आज बहुत से लोग सुख की चाह में बाहर की दौड़ लगा रहे हैं। जबकि यह बात समझनी चाहिए कि सुख मन के अंदर है। पहले उसे प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साधु का काम समाज को जोड़ना होता है। पहले गांव, जिला प्रांत और देश को जोड़ें, पूरी दुनिया खुद ही जुड़ जाएगी।
उन्होंने कहा कि पहला कार्य अच्छा करना नहीं बल्कि अच्छा कार्य करने के लिए माहौल बनाना होता है और इसके लिए कुर्सी पर माहौल बन जाने तक बने रहना जरूरी है। संघ प्रमुख ने कहा कि जब कुर्सी पर बैठे लोगों को यह डर सताने लगता है कि मैं ऐसा कार्य नहीं करूंगा तो कुर्सी बनी रहेगी या चली जाएगी, तब व्यक्ति गलत कार्य करता है।
योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि संत शब्द अपने आप में परिपूर्ण है। देश के वजीर और अमीर से साधु को कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। क्योंकि अमीर और वजीर जो काम नहीं कर पाते, वह काम साधु कर देता है। साधु को कर्मयोगी होना चाहिए। वह दिव्य कर्म करता है। इस आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों ने हिस्सा लिया।