पोस्टमार्टम के बाद रात में परिजन शव गांव ले गए। वहीं, शनिवार को मामले ने फिर तूल पकड़ लिया। परिजन और सैकड़ों ग्रामीण शव लेकर हाईवे से होते हुए गंगनहर की पटरी पर जाने लगे। इससे पुलिस में खलबली मच गई। आननफानन में एसपी देहात एसके सिंह, सीओ मंगलौर डीएस रावत, एएसडीएम रविंद्र सिंह बिष्ट, मंगलौर कोतवाली प्रभारी प्रदीप चौहान समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और उन्हें रोक लिया।
इस पर परिजन और ग्रामीण शव को लेकर गंगनहर पटरी के पास धरने पर बैठ गए। इसी बीच भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष महक सिंह भी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण एक सदस्य को सरकारी नौकरी और 25 लाख रुपये का मुआवजा मांगने लगे।
साथ ही ग्राम प्रधान पति समेत चारों की गिरफ्तारी के बाद ही अंतिम संस्कार करने की जिद पर अड़ गए। इस दौरान परिजनों ने एएसडीएम को एक ज्ञापन भी सौंपा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द गिरफ्तारी की जाएगी और उन्हें सरकार से उचित सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हुए। इसके बाद पुलिस सुरक्षा के बीच मृतक का अंतिम संस्कार हुआ।
मजिस्ट्रेट जांच के बाद होगी कार्रवाई
एएसडीएम रविंद्र सिंह बिष्ट ने ग्रामीणों को बताया कि जिस दिन दीपक की मौत हुई थी, उसी दिन डीएम ने मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए थे। इस मामले की मजिस्ट्रेटी जांच चल रही है। जो भी जांच में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा।