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रुड़की: अब न इंजन से निकलता है धुआं, न फव्वारे से फूटते हैं रंग 

Sat, 21 Jul 2018 06:00 AM IST
लवजीत शर्मा, अमर उजाला, रुड़की
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भाप इंजन को यात्रियों के आकर्षण के लिए चलाया जता था
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रेलवे के ‘ए’ ग्रेड श्रेणी के स्टेशन रुड़की पर लगा पुराना भाप इंजन और फव्वारा देखरेख नहीं होने से बदहाल स्थिति में आ गए हैं। सौंदर्यीकरण के नाम पर रेलवे ने दोनों पर लाखों खर्च किये हैं।

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फव्वारे की रंग-बिरंगी लाइटों से होकर गिरने वाला पानी शहर में आकर्षण का केंद्र रहा है। भाप इंजन को यात्रियों के आकर्षण के लिए चलाया जता था। इससे निकलने वाला धुएं से आने वालों को रेलवे के गुजरे जमाने की याद तरोताजा होती थी। दो माह से न तो इंजन से धुआं निकल रहा है, न ही सतरंगी लाइटों के बीच पानी का फव्वारा फूट रहा है। 

रेलवे ने पांच वर्ष पूर्व स्टेशन के प्रवेश द्वार पर पुराना भाप इंजन और रोशनी वाला आधुनिक फव्वारा लगाया था। फव्वारा गंदे पानी से लबालब भरा है। ठहरे पानी की बदबू से यात्रियों उसके पास नहीं फटकते। बहरहाल, मक्खी मच्छरों ने उसे अपना ठिकाना बना लिया है। स्टीम इंजन बंद पड़े होने से उसकी आवाज और उसकी चिमनी से निकलने वाला धुआं भी दिखाई नहीं देता। हरियाणा के जमना नगर निवासी राजेंद्र शर्मा, देहरादून रायपुर निवासी सुरेश कुमार का कहना है कि वह जब भी रुड़की आते हैं तो वह रेलवे स्टेशन पर चलते पुराने जमाने के स्टीम इंजन को जरूर देखने के लिए आते थे।
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इंजन चलता देख उनको पुराने जमाने की याद ताजा हो जाती थी। लेकिन वह शनिवार को रुड़की आए थे। जहां यह नजारा देखने को नहीं मिला। इस संबंध में रेलवे के प्रवर खंड अभियंता विद्युत वीके गुप्ता का कहना कि उनके द्वारा विद्युत की व्यवस्था कि गई है। फव्वारे में पानी की व्यवस्था करना निमार्ण विभाग का होता है। इसके अलावा इंजन को चलाने के लिए मुरादाबाद या लक्सर से लोको पायलट आते हैं। जो अब इंजन को चलाने के लिए यहां नहीं पहुंच रहे हैं। निर्माण निरीक्षक एके अग्रवाल का कहना है पानी क्यों नहीं भरा जा रहा इसकी जांच करवाएंगे। जल्द इसे चालू हालात में लाया जाएगा। 

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