हालांकि, इसके बाद दिनेश कौशिक ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। वर्ष 2008 में भी नगर पालिका चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अश्वनी कौशिक और निर्दलीय प्रदीप बत्रा के बीच जबरदस्त टक्कर हुई। आखिरकार इस चुनाव में भी निर्दलीय प्रदीप बत्रा, भाजपा के प्रत्याशी को शिकस्त देने में कामयाब रहे। हालांकि, बाद में प्रदीप बत्रा ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया।
इसके बाद नगर पालिका रुड़की को नगर निगम का दर्जा मिल गया। वर्ष 2013 में नगर निगम का पहला चुनाव हुआ तो निर्दलीय यशपाल राणा और बीजेपी प्रत्याशी महेंद्र काला में टक्कर हुई। इस चुनाव में भी निर्दलीय यशपाल राणा पर शिक्षानगरी के लोगों ने विश्वास जताते हुए भाजपा समेत तमाम पार्टियों के प्रत्याशियों को नकार दिया।
निर्दलीय यशपाल राणा नगर निगम के पहले मेयर बने। इस बार नगर निगम के चुनाव में भाजपा के मयंक गुप्ता, कांग्रेस के रिशू राणा और बसपा प्रत्याशी राजेंद्र बाडी के ऊपर इस मिथक को तोड़ने की चुनौती थी, लेकिन मतदाताओं ने पार्टी प्रत्याशियों को नकारते हुए भाजपा के बागी एवं निर्दलीय गौरव गोयल को मेयर का ताज सौंप दिया।