उन्होंने आरोप लगाया कि लोग तहसील में काम करवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन काम नहीं हो रहे हैं। लोग तहसील आते हैं और काम न होने पर बैरंग लौट जाते हैं। विधायक को भड़कता देख तहसीलदार सुशीला कोठियाल को भी गुस्सा आ गया और दोनों में कार्यालय में ही तीखी नोकझोंक हो गई। विधायक और तहसीलदार में नोकझोंक देख कार्यालय के बाहर भीड़ जमा हो गई। किसी तरह अन्य लोगों ने दोनों को शांत करवाया। इसके बाद विधायक लौट गईं। दोनों के बीच नोकझोंक तहसील में चर्चा का विषय रहा।
कलाहटी के पास बन रहे बिजली के सब स्टेशन को लेकर भूमि प्रबंधन समिति की ओर से प्रस्ताव गया है या नहीं और जमीन की पैमाइश की जानकारी के लिए तहसीलदार को फोन किया था, लेकिन तहसीलदार ने एक बार भी फोन रिसीव नहीं किया। जब वह मेरा फोन नहीं उठातीं तो आम जनता का क्या होगा? तहसील पहुंचकर इस पर आपत्ति जताई तो वह बहाना बनाने लगीं। तहसीलदार का यह व्यवहार गलत है।
- ममता राकेश, कांग्रेस विधायक, भगवानपुर
विधायक हों या आम जनता हर किसी की कॉल रिसीव करती हूं। व्यस्तता के कारण कभी फोन रिसीव नहीं हो पाता है। रही बात विधायक के फोन रिसीव करने की तो वह हमेशा अनावश्यक काम करवाने के लिए फोन कर दबाव बनाती हैं, जो सही नहीं है। कई बार तो फोन पर ही अभद्रता कर देती हैं।
-सुशीला कोठियाल, तहसीलदार, भगवानपुर