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...कहीं फिर न रह जाए खाली झोली

Fri, 19 Feb 2016 07:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला रुड़की
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भले ही रुड़की रेलवे स्टेशन को ए-श्रेणी का दर्जा दिया गया है। साथ ही यहां कई केंद्रीय और महत्वपूर्ण संस्थान हैं। लेकिन इसके बावजूद यहां मुख्य ट्रेनों का ठहराव नहीं है। इससे आए दिन शहरवासियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं पाडली गुर्जर और पनियाला रोड रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज की भी दरकार है। लोगों को उम्मीद है कि इस बार के रेल बजट में रुड़की की मांगों को भी स्थान मिलेगा। अब देखना है कि इस रेल बजट में रुड़की के हाथ कुछ आता है या एकबार फिर यहां की झोली खाली रह जाती है।
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रुड़की रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन करीब डेढ़ सौ ट्रेनों का संचालन किया जाता है। इसमें से अप-डाउन मिलाकर लगभग 80 ट्रेनों का ठहराव भी रुड़की स्टेशन पर हैं। इसके अलावा बरौनी-अमृतसर, दरभंगा-अमृतसर, अकालतख्त, हिमगिरि एक्सप्रेस, साप्ताहिक गरीबरथ आदि ट्रेनों का रुड़की में ठहराव नहीं है, जिसके कारण आए दिन यहां के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

रुड़की स्टेशन से प्रतिदिन करीब 700 यात्री ट्रेनों में सफर करते हैं। यही कारण है कि यात्रियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से लंबे समय से उक्त ट्रेनों के रुड़की में ठहराव की मांग की जा रही है लेकिन हर बार रुड़की वासियों को निराशा ही हाथ लगती रही। अब एकबार फिर रेलवे बजट से रुड़की को ट्रेनों के स्टापेज की आस लगी है। इस संबंध में स्थानीय रेलवे की ओर से भी मुख्यालय को प्रस्ताव भेजे गए हैं। अब देखना यह है कि क्या रेल बजट में रुड़की के हाथ कुछ लगेगा या नहीं?
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क्या कहते हैं स्टेशन अधीक्षक
रुड़की स्टेशन के लिए उठ रही मांगों के संबंध में मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें ट्रेनों का स्टापेज और ओवरब्रिज बनाना मुख्य है, जिस पर मुख्यालय स्तर से ही निर्णय लिया जाना है।
-एसके वर्मा, स्टेशन अधीक्षक

राप्तीगंगा को नियमित करने की मांग
देहरादून से गोरखपुर के बीच चलने वाली राप्तीगंगा एक्सप्रेस को लेकर लंबे समय से नियमित करने की मांग उठ रही है, लेकिन आज तक इस पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे में रेल बजट से पूर्व एकबार फिर राप्तीगंगा एक्सप्रेस को प्रतिदिन करने की मांग की जा रही है। मालूम हो कि यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन ही चलती है और देहरादून से लक्सर होकर गोरखपुर जाती है। देहरादून से भी इस ट्रेन को नियमित करने की लगातार मांग की जाती रही है।
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