180 साल पहले मिट्टी का भराव करके बनाई थी गंगनहर
ब्रिटिश इंजीनियर प्रोबी कॉटले ने रुड़की की गंगनहर को काफी मेहनत और बेमिसाल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर बनाया था। खास बात यह थी कि मेहवड़ से रुड़की के बीच मिट्टी को खोदकर नहर नहीं निकाली गई बल्कि इसके उलट करीब 60 फुट मिट्टी का भराव कर गंगनहर बनाई गई थी। ऐसा इसलिए था कि यहां से सोलानी नदी पश्चिम से पूरब की ओर बहती है और इसी नदी पर पुल बनाकर गंगनहर को गुजारा जाना था। यहां पर नदी के ऊपर से गुजरती गंगनहर के लिए बनाया गया सोलानी एक्वाडक्ट आज भी इंजीनियरिंग के नायाब नमूने के रूप में जीवंत दिखाई दे रहा है। इसी के चलते पुल की ऊंचाई तक लाखों टन मिट्टी का भराव किया गया। यूपी सिंचाई विभाग ने भी मिट्टी भरान से बनी पुरानी गंगनहर के इस्तेमाल को खतरा बताया है।
मेहवड़ में खतरे के संकेत के लिए ही बनाए थे ऐतिहासिक शेर
मेहवड़ से रुड़की के बीच के प्रोबी कॉटले ने मुहाने पर चार शेरों का निर्माण किया था। ये शेर शहर की ऐतिहासिक विरासत भी हैं। यहां पर खतरे का संकेत दर्शाने के लिए ही इन शेरों का निर्माण किया गया था। यूपी सिंचाई विभाग के एसडीओ अनिल निमेष के मुताबिक गंगनहर निर्माण के समय निर्मित्त किए गए शेर उस समय भी खतरे का संकेत देने के लिए बनाए गए थे।
पुरानी गंगनहर को बने करीब 180 साल हो चुके हैं। इसके साथ बना पुल भी मियाद पूरी कर चुका है। वैसे भी मेहवड़ से रुड़की के बीच गंगनहर को मिट्टी का भरान करने के बाद बनाया गया है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की गतिविधि सुरक्षित नहीं हैं। इस संबंध में पर्यटन विभाग को पत्र भेजकर अवगत करा दिया गया है।
- अनिल निमेष, एसडीओ यूपी सिंचाई विभाग