इसरो के पूर्व अध्यक्ष पद्म विभूषण डॉ. के. कस्तूरीरंगन ने कहा कि खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के विषय में हो रहे विभिन्न विकासों के बारे में जानना बहुत रोमांचक हो सकता है। इस तरह का सबसे हालिया उदाहरण जेम्स वेब टेलीस्कोप का प्रक्षेपण है। जिसमें ब्रह्मांड के सबसे दूर तक पहुंचने या बिग बैंग की शुरुआत को देखने की क्षमता है। यह दूरबीन असाधारण रूप से भौतिकी, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और अन्य दिलचस्प वैज्ञानिक विषयों को जोड़ती है।
सोमवार को दून विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर रिसर्च और इनोवेशन सेल द्वारा आयोजित वेबीनार में देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े शोधार्थियों, विद्यार्थियों, प्राचार्य और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। दून विश्वविद्यालय कि कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने कहा कि विज्ञान समस्त विकास की आधारशिला है। जो कि वर्तमान परिप्रेक्ष में सार्थक प्रतीत होती है।
वेबीनार के दूसरे भाग में डॉ. कस्तूरीरंगन ने दून विश्वविद्यालय में होने वाली अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जो कि भारतीय महिला: सत्य आधारित दृष्टिकोण के ऊपर होने वाली है उसके ब्रोशर का विमोचन किया। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अप्रैल के प्रथम व द्वितीय सप्ताह में आयोजित किया जाएगा।
मंच संचालन प्रो. एचसी पुरोहित ने किया।
वेबीनार में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पेट्रोलियम देहरादून के निदेशक डॉ. अंजन रे, आईआईटी रुड़की के पूर्व संस्थापक निदेशक डॉ. प्रेमव्रत, डॉक्टर वसुधा कामत चेयरपर्सन गवर्निंग बॉडी ऑफ सीईसी, डॉ. बिंदेश्वर पाठक संस्थापक सुलभ इंटरनेशनल, डॉ. लीना गहाने उप सलाहकार नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल, डॉ. अचलेश, डॉ. चारू द्विवेदी, डॉ. प्रीति मिश्रा, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. हिमानी शर्मा, प्रो. आरपी मंमगाई, प्रो. हर्ष डोभाल, कुलसचिव डॉक्टर एमएस मंद्रवाल, डॉ. धृति, अतुल शाह और साकेत उनियाल आदि शामिल रहे।