देहरादून। रोडवेज चालकों की लापरवाही से हादसे न ेहों, इसके लिए चालकों को नए सिरे से ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। वैसे तो रोडवेज के प्रावधानों के तहत सभी चालकों का हर पांच साल के बाद ड्राइविंग टेस्ट होना चाहिए, लेकिन रोडवेज में तमाम ऐसे चालक हैं जिनका लंबे समय से ड्राइविंग टेस्ट नहीं किया गया है।
बता दें, रोडवेज चालकों की लापरवाही से यात्राओं के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के चलते जहां राहगीरों की मौत हो जाती है. वहीं परिवहन निगम प्रबंधन को पीड़ित परिजनों को भारी भरकम जुर्माना देना होता है। परिवहन निगम के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो परिवहन निगम प्रबंधन की ओर से विभिन्न दुर्घटनाओं को लेकर 1500 से अधिक मुकदमे विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। कई मुकदमों का निस्तारण होने से परिवहन निगम को करोड़ों का भुगतान पीड़ित परिजनों को करना पड़ा है। ऐसे में भविष्य में रोडवेज की बसों से हादसे न हो, इसके लिए चालकों का नए सिरे से ड्राइविंग टेस्ट किया जाएगा। महाप्रबंधक दीपक जैन का कहना है कि सभी चालकों का ड्राइविंग टेस्ट कराया जाएगा।