छह साल में 21.17 करोड़ रुपए खर्च और नतीजा सिफर। यह हाल है 42 किलोमीटर लंबे कालसी-चकराता मोटर मार्ग के।
इतनी धनराशि में जहां सड़क चमचमाती नजर आना चाहिए थी, वहां हालत खस्ताहाल बनी हुई है। सुरक्षा के नाम पर न तो पैराफिट बन सके और न ही खतरनाक जगहों पर मरम्मत हो पाई।
कहने को तो यह मोटर मार्ग जौनसार बावर की लाइफ लाइन कहा जाता है। लेकिन सड़क की हालत इस कदर खराब है कि अक्सर जगहों पर मलबा भरा हुआ है। इस मार्ग को 2009 से लेकर अब तक डबल लेन बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा चुका है।
सड़क पर सफर करते समय कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि सड़क चौड़ीकरण के लिए कुछ प्रयास किए जा रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य केशर सिंह नेगी, पूर्व बीडीसी सदस्य अमर सिंह चौहान, शूरवीर सिंह तोमर का कहना है कि टूटी सड़क होने के कारण कई हादसे हो चुके हैं। बताया कि इसे ठीक कराने के लिए कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।
एडीबी से मिला ज्यादा बजट
आंकड़ों पर गौर करें तो बीते छह साल में सड़क मरम्मत के लिए 21 करोड़ रुपए स्वीकृत हो चुके हैं। साल 2009 में एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) के तहत 14.70 करोड़, 2013 में 2.17 करोड़, 2014 में आपदा मद के तहत 30 लाख और अब राज्य योजना के तहत 4 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हो चुका है। वर्तमान में भी सड़क पर सुधारीकरण का काम चल रहा है।
ब्रिटिश काल में हुआ था निर्माण
कालसी-चकराता मार्ग का निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था। उस समय सड़क पर गेट सिस्टम लागू था। जिसके चलते एक समय में वाहन कालसी से चकराता और दूसरे समय चकराता से कालसी आते थे। 2009 में तत्कालीन सांसद विजय बहुगुणा ने गेट सिस्टम को बंद कराया जिसके बाद यहां डबल लेन की जरूरत महसूस होने लगी।
यहां है दिक्कत
ककाड़ी खड्ड, जजरेट, असनाड़ी, हईया के पास मलबा आने से सबसे अधिक परेशानी होती है। हल्की बरसात में इन जगहों पर मार्ग बंद हो जाता है। बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है।
हाल ही में सड़क लोक निर्माण विभाग साहिया को हस्तांतरित हुई है। इसमें चार करोड़ की लागत से कटिंग, सुधारीकरण, हाट मिक्स और पुलों की मरम्मत का काम प्रस्तावित है।
- मुकेश परमार, अधिशासी अभियंता