चीन-नेपाल सीमा सटे से उन इलाकों में फौजियों के बूटों की ताल गूंजेगी जहां सड़क न होने की वजह से सेना के जवानों को गश्त करने में दिक्कत आती थी। सरहद के नजदीकी इन इलाकों में नजर रखना मुश्किल हो रहा था। यहां का सड़क संबंधी प्रस्ताव केंद्र सरकार ने रोक दिया था, लेकिन जब सीमा सुरक्षा की निगहबानी की बात आई तो केंद्र सरकार ने प्रदेश शासन का यह प्रस्ताव पास कर दिया है।
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केंद्र सरकार ने दी हरी झंडी
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मोदी
पंचेश्वर बांध की वजह से केंद्र सरकार ने जौलजीवी तक 135 किमी सड़क बनाए जाने संबंधी प्रदेश शासन का प्रस्ताव रोक दिया था। यह कहा गया था कि बांध की सतह का मामला जब तक तय नहीं होता प्रस्ताव पर गौर नहीं होगा।
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Indian Army
- फोटो : Amar Ujala
बांध कब तक बन पाएगा? यह मामला तय नहीं है। सरहद किनारे बसे गांवों में सीमा सुरक्षा बल और दूसरे सैन्य बलों को अंदर तक छानबीन में मुश्किल खड़ी होती थी। इस संबंध में जल संसाधन मंत्रालय से भी बात की गई।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : Getty Images
सीमा सुरक्षा के लिए प्रस्ताव को जरूरी बताए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इसे हरी झंडी दे दी है। प्रदेश शासन से कहा गया है कि प्रस्ताव की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) दो हिस्सों में तैयार करे।
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money
डीपीआर का पहला हिस्सा केंद्र को भेजा जा चुका है, उस पर ढाई सौ करोड़ की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। अब डीपीआर का दूसरा मुख्य हिस्सा तैयार करने में शासन जुटा है। इसके पहुंचने के बाद केंद्र सरकार बजट तय करके जारी करेगी।
प्रदेश शासन रूपालीगाड से जौलजीवी तक की डीपीआर तैयार कर रहा है। शासन के सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने बताया कि यहां सड़क बन जाने पर चीन बार्डर के नजदीकी गांवों में सेना के जवानों को आसानी हो जाएगी। केंद्र ने प्रस्ताव रोक दिया था, लेकिन अब इसकी दो डीपीआर बनाकर भेजने के लिए कहा है। सड़क का निर्माण तीन ‘स्ट्रेच’ में किया जाएगा।