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8 माह में 857 सड़क हादसे 620 मौत, सरकार के लिए चुनौती बनें सड़क हादसे

Tue, 11 Sep 2018 08:57 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड सरकार के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाना बड़ी चुनौती बन गया है। पिछले आठ महीने में 857 सड़क हादसों में 620 लोग मारे जा चुके हैं।

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हादसे रोकने की तमाम कोशिशों के बावजूद मौतों का आंकड़ा पिछले साल के आंकड़े (564) की तुलना में अधिक है। पिछले वर्ष जुलाई माह तक 926 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी थी। इस साल इनकी संख्या (857) में कमी तो आई है, लेकिन इसमें मारे जाने वाले लोगों की संख्या अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, मैदानी जनपदों में सड़क हादसों की संख्या और उनमें मारे जाने वालों की तादाद भी सर्वाधिक है।

पर्वतीय जनपदों में  पौड़ी में सड़क हादसों की संख्या बेशक ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं हुई लेकिन इनमें मारे जाने वालों की संख्या चार गुना से अधिक हो चुकी है। इस लिहाज से सरकार के लिए हादसे और उनमें होने वाली मौतों को रोकना एक बड़ी चुनौती है।
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अस्सी फीसदी हादसे चार जनपदों में
प्रदेश के पर्वतीय जनपदों में हुए भीषण सड़क हादसे समूचे तंत्र और समाज का ध्यान खींचते हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 80 फीसदी दुर्घटनाएं चार जनपदों में होती हैं। इनमें देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जनपद शामिल हैं। 

2017            2018(जुलाई तक)
दुर्घटनाएं  -मौतें    दुर्घटनाएं - मौतें
926    564    857    620

2016            2017(दिसंबर तक)
दुर्घटनाएं -  मौतें    दुर्घटनाएं -   मौतें
1591    962    1603    942

चार मैदानी जनपदों में मौतों का ब्यौरा
जिला    2017    2018
देहरादून 76    72    
नैनीताल64    65
यूएसनगर140    131
हरिद्वार    112    114

पौड़ी, टिहरी व चंपावत में ज्यादा मौतें
चंपावत    15    33
बागेश्वर    02    07
पिथौरागढ़    26    03
रुद्रप्रयाग    07    06
चमोली    15    18
अल्मोड़ा    02    18
टिहरी    33    67
उत्तरकाशी 58    19
पौड़ी    14    67

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