फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अच्छी खबरः ग्लेशियर सिकुड़ने से नहीं सूखेंगी नदियां

Mon, 13 Jun 2016 11:19 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
glaciers - फोटो : Getty Images
विज्ञापन
ग्लेशियरों के सिकुड़ने या पिघलने से नदियों में पानी खत्म नहीं होगा। उच्च हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियरों से गंगा व ब्रह्मपुत्र बेसिन में आने वाले पानी का अध्ययन करने के बाद वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि ग्लेशियरों के सिकुड़ने से नदियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
विज्ञापन


अध्ययन के मुताबिक हिमालय की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कम से कम इस शताब्दी में तो नदियों में पानी की मात्रा पर कोई अंतर नहीं आने वाला। पर्यावरण से जुड़े कुछ संगठन अक्सर यह आशंका जताते रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग से सिकुड़ रहे ग्लेशियरों के कारण नदियों में पानी खत्म हो जाएगा।

स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिक डब्ल्यूडब्ल्यू इमरजील, एफ पिकोटी और एमएफपी ब्रिकेंस ने हिमालय क्षेत्र में इस बाबत अध्ययन किया। उच्च हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियरों से ब्रह्मपुत्र और गंगा में आने वाले पानी की मात्रा जांची गई। पाया गया गया कि नदियों में ग्लेशियर का सिर्फ 10 फीसदी पानी ही होता है। नदियों में बाकी पानी बारिश और भूगर्भ जलस्रोतों से आता है।
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

वर्षा जल की मात्रा में कोई कमी नहीं आई

rain in uttarkashi - फोटो : file photo
वैज्ञानिकों की मानें तो जलवायु परिवर्तन से बारिश के समय में तो बदलाव आया है लेकिन वर्षा जल की मात्रा में कोई कमी नहीं आई है। उनका कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग से पहले रिमझिम बारिश कई दिनों तक चलती थी, लेकिन अब एक ही समय में इकट्ठी बारिश हो जा रही है।

हिमालय क्षेत्र में अब बर्फबारी के बाद बर्फ जल्द पिघल जाती है, जिससे ग्लेशियरों को नुकसान हो रहा है। अगर ग्लेशियर से पिघल कर आने वाला पानी बहुत कम हो जाएगा तो भी बारिश से नदियों को पर्याप्त जल मिलता रहेगा। देश के वैज्ञानिक भी यही बात कहते आए हैं।

‘ग्लेशियरों के पिघलने से एक निश्चित मात्रा में ही पानी नदियों में आता है। अत: ग्लेशियरों में बदलाव का कोई ज्यादा फर्क नदियों पर नहीं पड़ने वाला है। नदियों में अधिकांश जल बारिश से आता है।’
- डॉ. डीपी डोभाल (वरिष्ठ ग्लेशियर विशेषज्ञ, वाडिया भू विज्ञान संस्थान)

‘भूमिगत जल और बारिश से नदियां भरी रहती हैं। ऐसे में ग्लेशियरों के सिकुड़ने से नदियां सूखेंगी नहीं।’
- डॉ. आशा थपलियाल (विज्ञानी उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें