प्रदेश की हर नदी के पानी की नियमित जांच की जाएगी। इसके साथ ही हर शहर में वायु प्रदूषण मापा जाएगा। जिन क्षेत्रों में अभी पानी और हवा की जांच की जा रही है, वहां की सख्ती से मॉनीटरिंग की जाएगी। इस संबंध में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने बुधवार को उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
प्रदेश में अभी गंगा और इसकी सहयोगी नदियों के पानी की जांच के लिए विभिन्न स्थानों पर 40 स्टेशन बनाए गए हैं। सहयोगी नदियां जिस स्थान पर गंगा में मिलती हैं, वहां पानी की जांच होती है। सीपीसीबी ने स्टेशनों की संख्या और बढ़ाने के लिए कहा है।
इसके साथ ही ऐसी नदियां जिनके पानी की अभी जांच नहीं होती है, वहां की भी नियमित जांच की जाएगी। जांच की सख्ती से मॉनीटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा वायु की जांच के लिए अभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के देहरादून में तीन तथा ऋषिकेश, काशीपुर, रुद्रपुर, हरिद्वार, हल्द्वानी में एक-एक स्टेशन बने हैं।
इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। दिल्ली में हुई सीपीसीबी की बैठक में हर प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण कमेटियों के अधिकारियों को बुलाया गया था। इसमें उत्तराखंड बोर्ड के अधिकारियों ने भी शिरकत की।
डेंटल कॉलेज पर 50 हजार जुर्माना
उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उत्तराखंड डेंटल कालेज पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। बोर्ड के पर्यावरण अधिकारी एसएस पाल ने बताया कि डेंटल कालेज ने बोर्ड से अनुमति नहीं ली थी। इसके अलावा जैविक कचरे का ढंग से निस्तारण नहीं किया जा रहा था।
डेंटल कॉलेज दूसरा अस्पताल है जिस पर बोर्ड ने 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। इसके पहले रुड़की के नन्हे-मुन्ने अस्पताल पर जुर्माना लगा था। पर्यावरण अधिकारी पाल ने बताया कि क्षेत्रीय अधिकारियों से और अस्पतालों के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है।