टिहरी जनपद के प्रताप नगर ब्लाक डोबराचाटी में प्रस्तावित पुल के लिए पिछले सात साल में एक ईट भी नहीं रखी गई और निर्माण के नाम पर ठेकेदार को 124 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। चार्टेड एकाउंटेंट राजेश प्रसाद पैन्यूली की ओर से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में इस गोलमाल का खुलासा हुआ है। इतना ही नहीं बल्कि पुल की डिजाइन के लिए आईएएस अधिकारी और अभियंता विदेश दौर पर आठ करोड़ की रकम भी फुंक चुके हैं।
2006 में स्वीकृत हुआ था पुल
प्रिंस चौक स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पैन्यूली ने बताया कि 2006 में उक्त पुल स्वीकृत हुआ था। तब पुल का स्पान 396 मीटर था, जिसे बाद में अवैज्ञानिक तरीके से बढ़ाकर 444 मीटर कर दिया गया। यह पुल 2008 में बनकर तैयार होना था, लेकिन 2012 में पता चला कि इसकी डिजाइन के लिए भूगर्भीय और विदेशों से तकनीकी अनुभव लेने की जरूरत बताई गई। इस प्रोजेक्ट के लिए विदेशी तकनीक हासिल करने के नाम पर उत्तराखंड के आईएएस अफसर और अभियंता आठ करोड़ की रकम फूंक चुके हैं।
129 करोड़ थी लागत
2006 में पुल निर्माण की अनुमानित लागत 129 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 170 करोड़ रुपये तक कर पहुंच गई है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को एक बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने मांग की कि इस मामले में उत्तराखंड सरकार श्वेतपत्र जारी करे। साथ ही घोटाले में शामिल संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि पुल न बनने से लगभग दो लाख की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित है।
इस पुल का निर्माण पुनर्वास विभाग द्वारा किया जाना था। इससे पहले एक बैठक का भी आयोजन किया गया जिसमें गढ़वाल सभा के टीएस असवाल, जनमंच के अशोक बहुखंडी, यूकेडी के मनमोहन लखेड़ा, सपा के विनोद बड़थ्वाल मौजूद थे।