उत्तराखंड में तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त रीता गहतोड़ी रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए दलित समुदाय के युवक की अंत्येष्टि में शामिल हुईं। अर्थी को बकायदा उन्होंने कंधा देने के साथ कब्रिस्तान में मिट्टी दी।
यहां गोर्खानगर के गरीब परिवार के कमाऊ सदस्य सुरेश कार्की के एकाएक बीमार होने से परिवार में आर्थिक संकट पैदा हो गया था। रीता ने इस बीच सुरेश के लिए दवा आदि की व्यवस्था करने के साथ स्थानीय प्रशासन के माध्यम से सीएम को इस परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए ज्ञापन भी दिया था।
रीता का कहना है कि महिला सशक्तीकरण की अवधारणा तभी मजबूत होगी, जब महिलाएं स्वयं हर कार्य में आगे आने के लिए प्रेरित होंगी।
मालूम हो कि रीता एवं इनकी दोनों बहनों ने अपने पिता की अंत्येष्टि में स्वयं कंधा देने, चिता को मुखाग्नि देने के साथ वर्षभर क्रियाकर्म कर उन लोगों को आइना दिखाया जो बेटी होते हुए पुत्र की चाह में अपने जीवन को अवसादपूर्ण बना देते हैं।