हिमालयी क्षेत्र के भूगर्भ में स्टोर हो रही इनर्जी की वजह से नेपाल, अफगानिस्तान के बाद भारत में भी भूकंप का खतरा मंडरा रहा है।
देश-विदेश के भूगर्भ विज्ञानियों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूगर्भ इनर्जी स्टोर हो रही है। भूगर्भीय टेक्टोनिक प्लेटें जहां कमजोर पड़ेंगी इनर्जी फट पड़ेगी जिससे आठ रेक्टर स्केल तक भूकंप आ सकता है। इससे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश दिल्ली, उत्तराखंड, एनसीआर, नार्थ ईस्ट और गुजरात तक भूकंप से जमीन थर्रा सकती है।
इंडियन प्लेट के यूरेशियन प्लेट के नीचे धंसने और तिब्बतन प्लेट सरकने की क्रिया ने पूरी हिमालयन बेल्ट की भूगर्भीय संरचना में उथल-पुथल मचा रखी है। इससे नए इनर्जी स्टोर बन रहे हैं जिससे भूकंप के मामले में हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता बढ़ गई है।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के भू-भौतिकी समूह के अध्यक्ष और वरिष्ठ भूकंप विशेषज्ञ डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि ये इनर्जी स्टोर कब फटेंगे यह भूगर्भीय प्लेटों के मूवमेंट पर निर्भर है लेकिन उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, नार्थ ईस्ट के प्रदेशो पर भूकंप का खतरा है। इसका असर दिल्ली, यूपी आदि क्षेत्रों तक जा सकता है।
भूगर्भीय गतिविधियां पैदा कर सकती हैं भूकंप की स्थिति
अमेरिकी भूगर्भ विज्ञानी डॉ. साइमन क्लेमपरर के मुताबिक तिब्बतन प्लेट के सरकने और इंडियन-यूरेशियन प्लेट की टकराहट से हिमालयी बेल्ट में कभी भी भूकंप के तेज झटके आ सकते हैं। भूगर्भीय गतिविधियां बार-बार भूकंप की स्थिति पैदा कर सकती हैं।
इसके अलावा एवरेस्ट के नीचे वेधशाला संचालित कर रहे इटली के विज्ञानी फिरेगिल पोरेटी, स्विटजरलैंड के आइगर एस. विला ने भूकंप के खतरे के प्रति सचेत किया है। उनका कहना है कि ताजा स्थिति से हिमालय बेल्ट में भूकंप की फ्रीक्वेंसी तेज होगी।
भूकंप की तीव्रता आठ रेक्टर स्केल तक पहुंचने का अंदेशा है। वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों ने बताया कि 25 अप्रैल को नेपाल में आए भूकंप में सिर्फ 8 फीसदी इनर्जी ही निकल पाई थी, 98 फीसदी भूगर्भ में बाकी है। इससे नेपाल से सटा भारत का हिस्सा प्रभावित होगा।
आधा घंटे पहले आते सिगनल
इटली के भूगर्भ विज्ञानी फिरेगिल पोरेटी के मुताबिक भूकंप आने के आधा घंटे पहले सिगनल आने लगते हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि इनर्जी दूसरी तरफ डायवर्ट हो जाती है और भूकंप नहीं आता। इसके अलावा विज्ञानियों ने रेडन गैस को भी भूकंप का पूर्व सूचक बताया है। भूकंप आने के पहले रेडन गैस जमीन से अधिक रिलीज होने लगती है।
भूगर्भ विज्ञानियों का सुझाव
- संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की व्यवस्था सदैव चुस्त रहे
- ऐसे क्षेत्रों में चिकित्सीय सुविधाएं, एंबुलेंस व्यवस्था मजबूत हो
- आबादी का घनत्व कम किया जाए
- भूकंपरोधी मानकों का आवासीय निर्माण में पालन किया जाए
- नागरिकों को भूकंप आपदा प्रबंधन के संबंध में प्रशिक्षित किया जाए
- नए संवेदनशील क्षेत्रों में सीइसमोग्राफ, जीपीएस सिस्टम स्थापित हो
- ऐसे आटो एलर्ट सिस्टम बने जिससे लोगों को भूकंप आते ही सूचना मिले