बस की टक्कर का आखिरी शिकार तपोवन में एक दुकान हुई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दुकान की छत उड़ गई। बस को लड़खड़ाता देख लोगोें ने आगे आकर शोर मचाते हुए चालक को ब्रेक लगाने का इशारा किया। इसके बावजूद स्पीड धीमी नहीं हुई। आखिर में भीड़ के नजदीक जाकर बस रुक पाई। बस रुकते ही लोगों ने बस चालक को घेरकर फटकारना शुरू किया।
सूचना पाकर बच्चों के परिजन भी एकत्रित हो गए। कुछ लोगों ने लक्ष्मणझूला सहित मुनिकीरेती और कोतवाली ऋषिकेश पुलिस को भी सूचना दी। इसके बावजूद कोई पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बस चालक का कहना था कि वह करीब 30 साल बाद वाहन का स्टियरिंग संभाल रहा है।
बस में सवार कंडक्टर ने भी लोगों को बताया कि उसने चालक को समझाया था कि वाहन नहीं संभल रहा है। कहीं पार्क कर दो, दूसरा चालक आकर ले जाएगा। इस पर भी बेअंदाज बस चालक नहीं माना और 36 बच्चों की जान जोखिम में डालकर वाहन को सड़क पर दौड़ाता रहा।
इस मामले में डीएसबी इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल शिव सहगल से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। प्रिंसिपल का पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
खोखा के मालिक मोहन नेगी ने बताया कि डीएसबी स्कूल की बस का चालक अनाड़ी था। खोखे के समीप अन्य दुकानों पर भी उसने बस से टक्कर मारी। उसने बताया कि ड्राइवर ने स्वयं स्वीकारा किया है कि वह 30 वर्षों के बाद बस चला रहा है। डीएसबी स्कूल मेें 11वीं के एक छात्र की मां ने बताया कि उनके बच्चे ने घर पहुंचकर बस दुर्घटना के बारे में बताया। इसकी शिकायत स्कूल के प्रिंसिपल से की जाएगी।
सोमवार को मैं देहरादून थी। घटना के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो यह गंभीर घटना है। मंगलवार को दफ्तर पहुंचकर मामले की पड़ताल करूंगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- उमा पंवार, खंड शिक्षा अधिकारी डोईवाला