सप्तऋषि क्षेत्र के घाट यात्रियों के लिए काल साबित हो रहे हैं। नदी से सटे आश्रमों ने यात्रियों की सुविधा के लिए स्नान घाट बनाए हैं, लेकिन इन घाटों पर रेलिंग, चेन, जलस्तर के चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। घाटों के आसपास बाढ़ सुरक्षा के लिए लगाए गए क्षतिग्रस्त जाल का खतरा बने हुए हैं।
हरियाणा से आई दो सगी बहनें कुसम और सीमा व उनकी ननद नेहा रविवार सुबह हरिपुरकलां स्थित गीता कुटीर घाट पर स्नान के लिए पहुंची थीं। तब पानी का जलस्तर काफी कम था। तीनों को घाट के किनारे नहाने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में तीनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर नदी में कुछ आगे तक चली गईं। इस बीच अचानक गंगा का जलस्तर बढ़ गया। समय रहते तीनों पानी बढ़ने का अंदाजा नहीं लगा पाईं। यही चूक उनकी जिंदगी पर भारी पड़ हुई। तीनों नदी के तेज बहाव में बह गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीनों ने एक दूसरे का हाथ नहीं छोड़ा, लेकिन कुछ देर तक संघर्ष के बाद तीनों गंगा की तेज धारा में ओझल हो गईं।
सप्तऋषि क्षेत्र में कई संवेदनशील घाट हैं। स्नान घाटों पर आए दिन यात्रियों और फक्कड़ों के डूबने के मामने सामने आते हैं। असल में आसपास के आश्रमों की ओर से बनाए गए स्नान घाटों पर सुरक्षा उपायों को लेकर संचालक और उत्तराखंड सिंचाई विभाग दोनों ही गंभीर नहीं है। इनमें से कई घाटों पर रेलिंग नहीं है, जहां रेलिंग है वह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। गंगा घाटों की अधिकांश चेन टूटी हुई हैं।
भूकटाव को रोकने के लिए लगाए गए जाल क्षतिग्रस्त होने के बाद घाटों के आसपास आ जाते हैं। कई बार यात्री इन जालों में उलझकर नदी में बह जाते है। पूर्व में मेलाधिकारी दीपक रावत ने सप्तऋषि क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान उत्तराखंड सिंचाई विभाग को घाटों पर रेलिंग, चेन की मरम्मत और जलस्तर चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
संबंधित अधिकारियों से तीनों यात्रियों के बहने के घटनाक्रम की जानकारी ली जाएगी। अगर घाटों के आसपास सुरक्षा इंतजामों की कमी की बात सामने आती है तो संबंधित विभाग के अधिकारियों सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे।
-डॉ. अपूर्वा पांडेय (आईएएस), एसडीएम, ऋषिकेश