परिजनों ने बताया कि जब वह जलती हुई झोपड़ी में पहुंचे तो आग के विकराल होने के कारण झोपड़ी में नहीं घुस पाए, झोपड़ी के ऊपर प्लास्टिक रखा हुआ था जो जलकर गलने से टपक रहा था। मंगत सिंह के तीन बेटों ने पुलिस को लिखित प्रार्थना पत्र देकर पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी कार्रवाई न किए जाने की बात कही है। प्रभारी निरीक्षक केसी भट्ट ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला हादसे का प्रतीत हो रहा है और किसी प्रकार की आपराधिक गतिविधि सामने नहीं आई है। बावजूद इसके घटना की जांच की जा रही है। शव परिजनों को सौंप दिया गया है।