एसएसपी (पौड़ी) दिलीप सिंह कुंवर ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत कांवड़ियों व अन्य यात्रियों को नीलकंठ महादेव मंदिर तक जाने के लिए बैराज मार्ग से जाना होगा। इसी मार्ग से वापस भी आना होगा। दोपहिया और चौपहिया वाहनों को बैराज मार्ग से जाना होगा और वापसी के लिए गरुड़चट्टी पुल से मुनिकीरेती बाईपास का इस्तेमाल करना होगा। बता दें कि सप्ताह भर में कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है। ऐसे मेें प्रशासन के समक्ष सीमित समय में वैकल्पिक व्यवस्थाएं बनाना भी मुश्किल होगा।
गौरतलब है कि हाल ही में लोक निर्माण विभाग की ओर से जारी सर्वे रिपोर्ट में बताया गया था कि लक्ष्मण झूला पुल की निर्धारित मियाद 90 साल पूरी हो चुकी है। पुल से आवागमन खतरे से खाली नहीं है।
66 और जर्जर पुल बदले जाएंगे
लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश में 66 ऐसे पुल चिह्नित किए हैं, जो जर्जर हो गए हैं। प्रमुख अभियंता (लोनिवि) हरिओम शर्मा ने बताया कि इन पुलों के स्थान पर नए पुल बनाए जाने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है।
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सभी पुलों की तकनीकी जांच होगी: मुख्य सचिव
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश के सभी मोटर और पैदल पुलों की तकनीकी जांच करा रहे हैं। जहां पुल सुरक्षित नहीं होंगे, वहां सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाएगी