कार्यक्रम में उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, आसाम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम व मणिपुर राज्य के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
विकास का लाभ कैसे मिले
बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के बीच हिमालयी इकोलॉजी की रक्षा के साथ कैसे विकास का लाभ यहां के लोगों तक पहुंचाया जा सकता है, कान्क्लेव का यह मुख्य एजेंडा है। हिमालय के संसाधनों का उपयोग यहां की अर्थव्यवस्था को उन्नत करने में कैसे किया जा सकता? सम्मेलन में रोजगार और पलायन सरीखे गंभीर मसलों पर मंथन होगा। सभी हिमालयी राज्यों की सीमाएं दूसरे देशों से जुड़ी हुई हैं। इस दृष्टि से भी कान्क्लेव में चर्चा की जा सकती है।
ग्लोबल वार्मिंग से बचाने की चुनौती
पीएम मोदी ने जलशक्ति मंत्रालय बनाकर जल संरक्षण व जल संवर्द्धन की बड़ी पहल की है। इसमें हिमालयी राज्यों की सहभागिता बहुत जरूरी है। ग्लेशियरों, नदियों, झीलों, तालाबों व वनों को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने की चुनौती भी कान्क्लेव का प्रमुख विषय होगा।