इस पुल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पर आवाजाही दोबारा शुरू होने की स्थिति के संबंध में विशेषज्ञों से और सुझाव लिए जाएंगे। प्रारंभ में इसके एक स्क्वायर मीटर में 200 किलो भार क्षमता आंकी गई थी।
वर्तमान में इसका पिलर झुक रहा है। विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि कैसे पुल को ठीक किया जा सकता है। इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय से डॉ. पार्थो सेन, डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. अंकुश मित्तल, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. पवन कुमार इमानी आदि उपस्थित रहे।
पुल बंद करने से पहले उसका तकनीकी अध्ययन आईआईटी के वैज्ञानिकों ने किया है। पुल को मूल स्वरूप से संरक्षित करन से पहले आईआईटी की रिपोर्ट के हर पहलू का गहनता से अध्ययन किया जाए।
मुख्यमंत्री का कहना है कि यदि इसके संरक्षण में कोई तकनीकी जानकारी प्राप्त हो सकती है तो इस दिशा में भी पहल की जाए। उन्होंने ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से सभी तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना बनाने को कहा।