खास बात ये रही कि पुल सील करने के दौरान आशंका के मुताबिक कोई विरोध प्रदर्शन देखने को नहीं मिला। करीब दो घंटे चली प्रक्रिया के बाद प्रशासनिक अमले ने चैन की सांस ली।
झूला पुल पूरी तरह बंद करने के लिए टिहरी, पौड़ी और स्थानीय प्रशासन ने योजना के मुताबिक काम किया। पूर्व में प्रदर्शनकारी विधायक ऋतु खंडूड़ी के मान मनौव्वल को भी नजरंदाज कर चुके थे। लिहाजा पुलिस प्रशासन ने बेहद चौकन्ना कदम अख्तियार किया।
शाम को करीब चार बजे एसएसपी टिहरी ने कांवड़ यात्रा की बैठक ली। इस दौरान स्थानीय व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों को भी सुझाव के बहाने बुलाया गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को बैठक के बहाने व्यस्त रखा गया।
उधर, लोक निर्माण विभाग शासनादेशों के मुताबिक झूला पुल पर आवाजाही के लिए पूरी तरह रोक लगाने की जुगत में लगे रहे। हालांकि व्यापारी सोमवार को भी पुल बंद करने के विरोध में बाजार बंद रखा। इसके बावजूद प्रशासन की मंशा के आगे प्रदर्शनकारियों की एक न चली।