सामरिक और राष्ट्रीय महत्व की ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के निर्माण के लिए उच्च गुणवत्ता वाली दो करोड़ मीट्रिक टन रोड़ी और बजरी का इंतजाम किया जाएगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रेल परियोजना निर्माण निगम को खनिज नीति में राहत देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कै
बिनेट के आदेश पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी की सिफारिश पर मुख्यमंत्री ने अपना अनुमोदन दे दिया है। सचिव (खनन) आरके सुधांशु ने इसकी पुष्टि की है। उनके मुताबिक, जल्द इस संबंध में आदेश जारी किया जाएगा।
रेल विकास निगम के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, 125 किमी लंबी रेल लाइन के 10 सिविल निर्माण कार्य के पैकेज हैं। इनमें 17 मुख्य सुरंगों का निर्माण होना है। 10 में से नौ सिविल कार्य अवार्ड कर दिए गए हैं। निर्माण एजेंसियां फील्ड में उतर चुकी हैं लेकिन रोड़ी, बजरी, पत्थर, मिट्टी की उपलब्धता और उपयोग के लिए राज्य सरकार की खनिज नीति के तहत अनुमति लेना आवश्यक है।
नीति के तहत प्रक्रिया लंबी है, जबकि परियोजना को तय समय सीमा पूरा करना है। सामरिक एवं राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए प्रदेश मंत्रिमंडल ने प्रोजेक्ट को खनिज नीति से राहत देने का नीतिगत निर्णय लिया। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी, लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए। लौटने के बाद उन्होंने फाइल पर अनुमोदन कर दिया है। सचिव (खनन) आरके सुधांशु के मुताबिक, एक-दो दिन में इस संबंध में आदेश हो जाएंगे।
स्वीकृति का सिंगल विंडो सिस्टम होगा
माना जा रहा है कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निर्माण में जुटी एजेंसियों को स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट स्थापित करने खनिज सामग्री का भंडारण और सुरंगों की खुदाई से निकलने वाली मिट्टी की परियोजना निर्माण प्रयोग से जुड़ी मंजूरी के लिए अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने होंगे। रेल विकास निगम की सिफारिश पर शासन सिंगल विंडो सिस्टम के आधार पर मंजूरी देगा।
बदरीनाथ-केदारनाथ रेल मार्ग की डीपीआर जल्द
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के साथ ही चारधाम रेल परियोजना का कार्य भी शुरू होने की संभावना है। रेलवे बोर्ड ने गंगोत्री-यमुनोत्री रेल परियोजना की डीपीआर को पहले ही मंजूरी दे दी है। बदरीनाथ-केदारनाथ रेल प्रोजेक्ट की डीपीआर भी अंतिम चरण में है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सोमवार तक डीपीआर तैयार कर बोर्ड को मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है। डोईवाला से गंगोत्री रेल मार्ग के निर्माण पर 29 हजार करोड़ खर्च होंगे।