सुझाव
मनोरोग विभाग के प्रो. रवि गुप्ता व डॉ. धीमान कहते हैं कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाने की प्रक्रिया में नींद की बीमारी से संबंधित जांच को भी प्रमुख मानकों में रखा जाना चाहिए। लाइसेंस प्रक्रिया के दौरान स्वास्थ्य जांच में नींद के स्वास्थ्य को भी शामिल किया जाए तो बेहतर होगा। साथ ही नियमित समय पर वाहन चालकों की नींद की बीमारी संबंधित जांचे की जानी चाहिए। प्रो. गुप्ता कहते हैं कि वाहन में एक ऐसा उपकरण (सेंसर) होना चाहिए जो ड्राइवर को नींद की समस्या होने पर अलर्ट करे। प्रो. गुप्ता कहते हैं कि ज्यादातर चालकों को पता होता है कि उन्हें नींद आ रही है, फिर भी वे वाहन चलाते रहते हैं। उन्हें सिखाया जाना चाहिए कि वे उस समय रुकें, झपकी लें और फिर तरोताजा महसूस होने पर वाहन चलाएं। व्यावसायिक वाहनों के मालिकों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कर्मचारी (ड्राइवर) पर्याप्त नींद ले रहे हैं और उन्हें कोई नींद संबंधी विकार नहीं है।