शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में अब केवल अपवंचित वर्ग के बच्चों को ही प्रवेश मिलेगा। बीपीएल कार्ड धारक, कमजोर वर्ग के बच्चे अब इस एक्ट के तहत प्रवेश नहीं पा सकेंगे।
आरटीई के तहत केंद्र से देय राशि न मिलने की वजह से यह फैसला लिया गया है। इस फैसले के मुताबिक कार्रवाई करने के लिए शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने बताया कि इस संबंध में तैयारियां चल रहीं हैं। प्रस्ताव कैबिनेट से पास होने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
केंद्र सरकार से प्रतिपूर्ति न होने से आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिल कराए बच्चों की फीस शिक्षा विभाग पर बकाया है। निजी स्कूल शिक्षा विभाग पर दबाव बनाए हुए हैं। ऐसी स्थिति के मद्देनजर वित्त विभाग ने शिक्षा विभाग से कहा है कि योजना के तहत राज्य सरकार से संपूर्ण धनराशि उपलब्ध कराया जाना संभव नहीं है। शिक्षा के अधिकार के प्रावधानों के तहत जिन बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाता है उन्हें अपवंचित श्रेणी -टू (डी)और कमजोर श्रेणी-टू (ई) में बांटा जाता है।
शासन ने फैसला किया है कि अपवंचित वर्ग के बच्चों को ही स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा। हालांकि, आरटीई के तहत सबसे अधिक बच्चे कमजोर वर्ग से आते हैं। शिक्षा विभाग जिलों से कमजोर वर्ग के प्रवेश पाए बच्चों का आंकड़ा भी जुटा रहा है। इस श्रेणी के बच्चों की वर्ष 2015-16 और 2016-17 की अवशेष प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। सचिव ने सुझाव दिया है कि भविष्य में केवल अपवंचित वर्ग के अंतर्गत चिह्नित श्रेणी के ही बच्चों के प्रवेश कराए जाएं। शिक्षा विभाग ने इसका ब्योरा तैयार करना शुरू कर दिया है।
अपवंचित वर्ग-टू (डी)
- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति।
- राज्य सरकार द्वारा घोषित अन्य पिछड़ा वर्ग (क्रीमीलेयर को छोड़कर)।
- अनाथ बच्चे।
- शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे जो नि:शक्त व्यक्ति के प्रावधानों के अंतर्गत अर्ह हों।
- ऐसे बच्चे जो विधवा अथवा तलाकशुदा माता पर आश्रित हों, जिनकी वार्षिक आय 80 हजार से कम हो।
- एचआईवी पीड़ित अथवा एचआईवी पीड़ित माता-पिता के बच्चे।
- निशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी अधिनियम, 1995 (अधिनियम सं. 1 वर्ष 1996 में यथा परिभाषित विकलांग माता-पिता के बच्चे) (कोढ़ से ग्रसित व्यक्तियों सहित) जिनकी वार्षिक आय 4.5 लाख रुपये से कम हो के, बच्चों को प्रवेशित किया जाता है।
कमजोर वर्ग -टू (ई)
- बीपीएल कार्ड धारक परिवारों के बच्चे।
- 55 हजार रुपये सालाना तक आय वाले परिवारों के बच्चे।
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिला पाए बच्चों का आंकड़ा
- वर्ष 2011-12 में 14087 बच्चे
- वर्ष 2012-13 में 31951 बच्चे
- वर्ष 2013-14 में 51798 बच्चे
- वर्ष 2014-15 में 66851 बच्चे
- वर्ष 2015-16 में 83450 बच्चे
- वर्ष 2016-17 में 95427 बच्चे