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पाक-श्रीलंका को ‘खरीदकर’ चीन ने भारत को घेर लिया: ले.जनरल ओपी कौशिक

Tue, 05 Nov 2019 10:12 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • राज्य सरकार और अमर उजाला की ओर से आयोजित सैन्य सम्मेलन में सैन्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता
  • लेफ्टिनेंट जनरल ओपी कौशिक ने कहा एक बार फिर तोड़ना चाहिए पाक को 
  • पूर्व रॉ चीफ आलोक जोशी बोले, उत्तराखंड को बनना होगा फ्रंटलाइन स्टेट
     
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लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) ओपी कौशिक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) ओपी कौशिक ने कहा कि दक्षिण एशिया में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती चीन है। चीन लंबी प्लानिंग के साथ काम कर रहा है। उसने दक्षिण एशिया के सभी छोटे देशों को लगभग ‘खरीदकर’ भारत को चारों ओर से घेरना शुरू कर दिया है।

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हिंद महासागर में भारत की स्थिति चीन के सामने बहुत कमजोर है। कौशिक राज्य सरकार और अमर उजाला की ओर से सैन्य सम्मेलन में ‘राष्ट्रीय सुरक्षा : चुनौतियों के बदलते आयाम’ विषय पर सैन्य व खुफिया विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर रहे थे। 

हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के इस सत्र में रिसर्च एंड एनालेसिस विंग (रॉ) के पूर्व चीफ आलोक जोशी ने कहा कि उत्तराखंड का नेपाल के साथ 300 किमी और चीन के साथ 350 किमी खुला बॉर्डर है। चीन और नेपाल के रिश्ते बेहतर हुए हैं और नेपाल ने भारत से दूरी बनानी शुरू कर दी हैं। ऐसे में उत्तराखंड को एक फ्रंटलाइन स्टेट के तौर पर खुद को विकसित करना होगा। 
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लेफ्टिनेंट जनरल ओपी कौशिक ने कहा पाकिस्तान की स्थिति 40 साल पहले से भी खराब है। हम जब चाहें पाकिस्तान को फिर तोड़ सकते हैं। यह जरूरी भी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी ओर इशारा कर चुके हैं। लेकिन, हमें ज्यादा खतरा चीन से है। उसने श्रीलंका को ऋण दिया और वहां एक बंदरगाह 90 साल के लिए ले लिया। पाकिस्तान को भी उसने खरीद लिया। बांग्लादेश भी चीन की ओर झुक रहा है। 

इधर, रॉ की पूर्व अधिकारी रेणुका मट्टू ने प्रत्येक आंतकी हमले के बाद खुफिया तंत्र को जिम्मेदार ठहराने की बात का विरोध किया। कहा कि सूचनाओं को कभी प्लान में तब्दील करने में देर भी हो जाती है और कभी यदि समय पर प्लान ऑफ एक्शन बन गया तो स्थिति में सुधार किया जा सकता है। सत्र का संचालन अमर उजाला के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री ने किया। 

हो चुकी है सीमा विकास फंड की व्यवस्था: सीएम 

सत्र के बीच कुछ पूर्व सैनिकों ने वक्ताओं के माध्यम से मुख्यमंत्री से सवाल पूछा कि उत्तराखंड की सीमाओं को लेकर कहां तक काम हुआ है। उन्होंने कुछ सुझाव देते हुए सीमा विकास फंड की व्यवस्था करने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि उन्होंने 24 अक्तूबर को हर्षिल में सीमा विकास फंड का ऐलान कर दिया है। जल्द ही इस पर काम भी शुरू हो जाएगा। 

चीनी भाषा को दें विवि की पढ़ाई में तरजीह
सत्र में पूर्व रॉ चीफ आलोक जोशी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को मशविरा भी दिया। उन्होंने कहा कि चीन की सीमा सबसे ज्यादा उत्तराखंड के करीब है। ऐसे में यहां के शिक्षण संस्थानों में चीनी भाषा पढ़ाई जानी चाहिए। ताकि, समय आने पर हम उनके साथ भाषाई तालमेल भी बैठा सकें। यह हमारी रणनीति में भी अच्छा कदम साबित होगा। 

चीन के खिलाफ चलनी होगी कूटनीतिक चाल 
लेफ्टिनेंट जनरल ओपी कौशिक ने कहा कि चीन अंदरखाने भारत में अस्थिरता लाने का प्रयास करता है। वह कश्मीर में अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की मदद करता है। ऐसे में हमें भी तिब्बत में चीन विरोधी लोगों को किसी न किसी तरह समर्थन करना चाहिए।
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सीमा पर बसने चाहिए गांव: तरुण विजय

पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय ने कहा कि खाली सीमा, जनरहित सीमा देश के लिए सबसे खतरनाक होती है। क्योंकि फौज जाने से पहले हमारा नागरिक वहां पर दुश्मन का सामना करता है और दुश्मन की खबर लेता है।

मेरा सैनिक मेरा सम्मान सैन्य सम्मेलन में पहुंचे पूर्व सांसद तरुण विजय ने अमर उजला से खास बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जनता को बसाना चाहिए, गांव बसाना चाहिए, पूर्व सैनिकों को बसाना चाहिए। जो सुविधा देहरादून के स्कूलों में नहीं है उससे भी बेहतर सुविधा बाड़ाहोती, नीती माणा जैसे इन सब सीमावर्ती क्षेत्रों में होनी चाहिए। उतने बढ़िया विद्यालय होने चाहिए, सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं वाले हॉस्पिटल होने चाहिए।

वहां जाने आने के साधन हाईवे की तरह होने चाहिए। पूर्व सांसद तरुण विजय ने कहा कि वे लंबे समय से इस बात के लिए अभियान चला रहे हैं कि हमारे विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्रों और नौजवानों के बीच में सैनिकों की शौर्य गाथा को जगह मिलनी चाहिए।

सैनिक प्रशिक्षण कई देशों में छात्रों के लिए अनिवार्य है। भारत के शिक्षण संस्थानों में क्यों नहीं है, जो डेढ़ हजार साल से विदेशी आक्रमणों का सामना करता रहा। आज भी जिसकी दोनों ओर की सीमाएं चुनौती का सामना कर रही हैं। दो देश हिंदुस्तान के दोनों तरफ हैं और दोनों परमाणु शक्ति संपन्न हैं और दोनों के साथ सीमा विवाद चल रहा है।

इसलिए उत्तराखंड देश का ऐसा पहला प्रांत होना चाहिए जो यह घोषित करे कि हमारे विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चीन सीमा पर लगातार संसाधन बढ़ा रहा है। चीन और तिब्ब्त से लगती उत्तराखंड की तीन सौ किलोमीटर सीमा पर पर्याप्त हाईवे नहीं बने हैं। मिलम ग्लेशियर के मुहाने तक चीन के बड़े ट्रक आते हैं।

चीन का छह लेन का हाईवे वहां पर बना है। हमारे फौजियों को आज भी वहां पर तीन दिन चार दिन पैदल जाना पड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस दिशा में अभियान चलाया हुआ है। तरुण विजय ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए विशेष कमीशन अब तक नहीं बन पाया है।
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