सत्र के बीच कुछ पूर्व सैनिकों ने वक्ताओं के माध्यम से मुख्यमंत्री से सवाल पूछा कि उत्तराखंड की सीमाओं को लेकर कहां तक काम हुआ है। उन्होंने कुछ सुझाव देते हुए सीमा विकास फंड की व्यवस्था करने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि उन्होंने 24 अक्तूबर को हर्षिल में सीमा विकास फंड का ऐलान कर दिया है। जल्द ही इस पर काम भी शुरू हो जाएगा।
चीनी भाषा को दें विवि की पढ़ाई में तरजीह
सत्र में पूर्व रॉ चीफ आलोक जोशी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को मशविरा भी दिया। उन्होंने कहा कि चीन की सीमा सबसे ज्यादा उत्तराखंड के करीब है। ऐसे में यहां के शिक्षण संस्थानों में चीनी भाषा पढ़ाई जानी चाहिए। ताकि, समय आने पर हम उनके साथ भाषाई तालमेल भी बैठा सकें। यह हमारी रणनीति में भी अच्छा कदम साबित होगा।
चीन के खिलाफ चलनी होगी कूटनीतिक चाल
लेफ्टिनेंट जनरल ओपी कौशिक ने कहा कि चीन अंदरखाने भारत में अस्थिरता लाने का प्रयास करता है। वह कश्मीर में अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की मदद करता है। ऐसे में हमें भी तिब्बत में चीन विरोधी लोगों को किसी न किसी तरह समर्थन करना चाहिए।
पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय ने कहा कि खाली सीमा, जनरहित सीमा देश के लिए सबसे खतरनाक होती है। क्योंकि फौज जाने से पहले हमारा नागरिक वहां पर दुश्मन का सामना करता है और दुश्मन की खबर लेता है।
मेरा सैनिक मेरा सम्मान सैन्य सम्मेलन में पहुंचे पूर्व सांसद तरुण विजय ने अमर उजला से खास बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जनता को बसाना चाहिए, गांव बसाना चाहिए, पूर्व सैनिकों को बसाना चाहिए। जो सुविधा देहरादून के स्कूलों में नहीं है उससे भी बेहतर सुविधा बाड़ाहोती, नीती माणा जैसे इन सब सीमावर्ती क्षेत्रों में होनी चाहिए। उतने बढ़िया विद्यालय होने चाहिए, सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं वाले हॉस्पिटल होने चाहिए।
वहां जाने आने के साधन हाईवे की तरह होने चाहिए। पूर्व सांसद तरुण विजय ने कहा कि वे लंबे समय से इस बात के लिए अभियान चला रहे हैं कि हमारे विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्रों और नौजवानों के बीच में सैनिकों की शौर्य गाथा को जगह मिलनी चाहिए।
सैनिक प्रशिक्षण कई देशों में छात्रों के लिए अनिवार्य है। भारत के शिक्षण संस्थानों में क्यों नहीं है, जो डेढ़ हजार साल से विदेशी आक्रमणों का सामना करता रहा। आज भी जिसकी दोनों ओर की सीमाएं चुनौती का सामना कर रही हैं। दो देश हिंदुस्तान के दोनों तरफ हैं और दोनों परमाणु शक्ति संपन्न हैं और दोनों के साथ सीमा विवाद चल रहा है।
इसलिए उत्तराखंड देश का ऐसा पहला प्रांत होना चाहिए जो यह घोषित करे कि हमारे विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चीन सीमा पर लगातार संसाधन बढ़ा रहा है। चीन और तिब्ब्त से लगती उत्तराखंड की तीन सौ किलोमीटर सीमा पर पर्याप्त हाईवे नहीं बने हैं। मिलम ग्लेशियर के मुहाने तक चीन के बड़े ट्रक आते हैं।
चीन का छह लेन का हाईवे वहां पर बना है। हमारे फौजियों को आज भी वहां पर तीन दिन चार दिन पैदल जाना पड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस दिशा में अभियान चलाया हुआ है। तरुण विजय ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए विशेष कमीशन अब तक नहीं बन पाया है।