उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के पदाधिकारियों व सदस्यों ने पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने डीजीपी से एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी व सदस्यों को झूठे मुकदमे में फंसाने की शिकायत की।
उन्होंने बताया कि विशेष न्यायालय ने अध्यक्ष की गिरफ्तारी को लेकर दाखिल क्रिमिनल वाद को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोशी व सदस्यों पर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए मुकदमे को निरस्त करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि प्रदेश अध्यक्ष व सदस्यों को गिरफ्तार करने की कोशिश हुई तो इसके खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी की अध्यक्षता में डीजीपी से मिले प्रतिनिधिमंडल में गढ़वाल मंडल उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह चौहान, रीता कौल, अनिल प्रकाश उनियाल व मुकेश ध्यानी शामिल थे। जोशी के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक को बताया गया कि आरक्षण मुक्त प्रमोशन खोले जाने के संबंध में एसोसिएशन आंदोलनरत थी। आंदोलन को प्रभावित करने के उद्देश्य से आरक्षण का समर्थन कर रहे पक्ष ने आंदोलन विफल करने के लिए उन पर अनर्गल व झूठे आरोप लगाए गए। जबकि उन्होंने न तो कोई कोई जाति सूचक शब्द और न ही अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया।
एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव वीरेंद्र सिंह गुसांई के मुताबिक, एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन ने द्वेष भावना के साथ एससी एसटी एट्रोसिटी एक्ट का दुरुपयोग कर अध्यक्ष को गिरफ्तार कराने का प्रयास किया। फेडरेशन की शिकायत की जांच डालनवाला क्षेत्राधिकारी के स्तर पर की जा रही है। जिसमें एसोसिएशन द्वारा पूरा सहयोग किया जा रहा है। लेकिन फेडरेशन के लोग प्रदेश अध्यक्ष की गिरफ्तारी को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है। कार्यालयों का सौहार्दपूर्ण वातावरण भी खराब हो रहा है। साथ सामाजिक स्तर पर वैमनस्यता बढ़ रही है जो किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है।
करम राम ने की व्यक्तिगत टिप्पणी
जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष करम राम ने एक प्रेस कांफ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष जोशी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी की। अन्य संवर्गों के लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर जोशी को जान से मारने की धमकी दी गई। इसके साक्ष्य पुलिस महानिदेशक को सौंपे गए।