उत्तराखंड में पदोन्नति में आरक्षण का मामला फिर गरमा गया है। आरक्षण को समाप्त करने के लिए राज्य कर्मचारियों ने उत्तराखंड अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक संघर्ष मोरचे का पुनर्गठन शनिवार को किया।
नवगठित मोर्चे की देहरादून में बैठक हुई और तय किया गया कि 31 अक्तूबर को सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री हरीश रावत और अन्य कैबिनेट मंत्रियों को भी बुलाया जाएगा। पदोन्नतियों में आरक्षण समाप्त करने को लेकर 2012 में उत्तराखंड में कर्मचारी सड़कों पर उतर आए थे।
उस समय पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को बाकायदा कैबिनेट में काम नहीं, तो वेतन नहीं का प्रस्ताव लेकर आना पड़ा था। बाद में सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण के मसले को जस्टिस इरशाद हुसैन आयोग को सौंपा। आयोग की रिपोर्ट अभी तक आई नहीं है।
दूसरी ओर सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश को 13 अक्तूबर तक का समय दिया है। शनिवार को इस मसले पर राज्य कर्मचारियों की बैठक में संयुक्त मोरचे का पुनर्गठन किया गया। 51 सदस्यीय कार्यकारिणी बनाई गई। पुनर्गठित संयुक्त संघर्ष मोरचे के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह के मुताबिक सितंबर, 1997 में सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश था कि पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त किया जाए।
इसके बाद भी सरकारों ने इस व्यवस्था को जारी रखा। अब सुप्रीम कोर्ट का साफ आदेश है कि 1997 के बाद पदोन्नति में आरक्षण के तहत पदोन्नत किए गए अधिकारियों, कर्मचारियों को रिवर्ट किया जाए। लेकिन, ऐसा नहीं किया जा रहा है। मोरचे के प्रवक्ता अरुण पांडे के मुताबिक कार्यकारिणी ने 31 अक्तूबर को महासम्मेलन करने का फैसला किया है।