उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान जेल गए या घायल हुए आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में आरक्षण देने के लिए सरकार ने जल्दबाजी में लाया गया विधेयक वापस ले लिया है। सदन के अंदर और बाहर विधेयक पर हुए विरोध के बाद सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। पक्ष और विपक्ष की सहमति के बाद सर्वसम्मति से विधेयक वापस हुआ।
आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया सहित अन्य सुझावों पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधेयक के लिए एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा।
विधेयक रखते हुए संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने कहा कि आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया जब खत्म होगी तब मौजूदा विधेयक में जरूरी संशोधन कर दिया जाएगा। फिलहाल जो विधेयक है, उसे पास कर दिया जाए।
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा कि आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण के लिए कटआफ तय डेट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब राज्य आंदोलन हुआ तो सभी आंदोलनकारी थे। इसके अलावा कई विधायकों ने आंदोलनकारियों के संबंध में अपने-अपने सुझाव दिए।