चौथे राज्य वित्त आयोग की सुनवाई बैठक में जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों ने धन की कमी को बेहद पीड़ा के साथ बयां किया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि अगर यही हालात रहे तो उनके लिए बतौर जनप्रतिनिधि काम करना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने वित्तीय आवंटन घटाने का निर्णय लिया है तो बेहतर होगा कि इस संस्था को समाप्त कर दिया जाए। सभी ने कहा कि लोग उनसे अपेक्षा बहुत रखते हैं, लेकिन उनकी वित्तीय शक्तियां शून्य हैं। इस पर वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने आश्वस्त किया कि लोकतंत्र की सफलता के लिए वह राज्य सरकार को अधिक से अधिक धन आवंटन की संस्तुति करेंगे।
विकास भवन सभागार में शनिवार को आयोजित बैठक में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. बीके जोशी ने कहा कि 14वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों की वजह से केंद्र सरकार ने जिला पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों का वित्तीय आवंटन लगभग समाप्त कर दिया है। इससे जनप्रतिनिधियों को बहुआयामी समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश का मसला है। इसके बावजूद राज्य वित्त आयोग जिला, क्षेत्र व ग्राम पंचायतों को अधिकाधिक धन आवंटन की सिफारिश प्रदेश सरकार से करेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र पंचायतों को साफ सफाई का काम सौंपा जा सकता है।