एम्स में संविदा पर तैनात सीनियर हिंदी अधिकारी को लंबे संघर्ष के बाद बड़ी कानूनी राहत मिली है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए एम्स प्रशासन को संविदा कर्मी की नियुक्ति की तिथि से नियमित करने के निर्देश दिए हैं। कैट ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि कर्मचारी की प्रारंभिक नियुक्ति संविदा आधार पर हुई थी, उसे नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता।
पंडितवाड़ी देहरादून निवासी नीरा तिवाड़ी ने इस संबंध में केट में मामला दर्ज कराया था। नीरा तिवारी ने बताया कि 11 फरवरी 2015 को उन्होंने एम्स में संविदा कर्मी के तौर पर वरिष्ठ हिंदी अधिकारी के पद पर तैनाती ली थी। 2 सितंबर 2025 को एम्स ने बिना कोई नोटिस दिए उनकी संविदा समाप्त कर दी और उन्हें गेट से अंदर नहीं आने दिया। जिस पर उन्होंने केट में शिकायत दर्ज कराई थी। केट ने 8 सितंबर 2025 को एम्स को निर्देश दिए कि उनकी संविदा कर्मी के तौर पर वापस नियुक्ति प्रदान की जाए। लेकिन एम्स ने केेट के इस निर्णय का पालन नहीं किया। नीरा तिवारी ने बताया बाद में उन्होंने अवमानना दायर की। कैट ने बीते 30 सितंबर को मामले में फैसला सुनाते हुए उन्हें 11 फरवरी 2015 से नियमित करने के आदेश दिया है। डॉ. छविलेंद्र राउल, सदस्य (प्रशासनिक) की पीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि आवेदिका की नियुक्ति किसी बैकडोर एंट्री के माध्यम से नहीं हुई थी, बल्कि विधिवत चयन प्रक्रिया के बाद हुई थी। वह जिस पद पर नियुक्त हुईं, वह स्वीकृत पद था। इसके बाद उन्होंने बिना किसी न्यायालयी आदेश के लगातार 10 वर्ष से अधिक समय तक एम्स में अपनी सेवाएं दीं।
आठ सप्ताह में करना होगा नियमितीकरण
अधिकरण ने एम्स को निर्देश दिया है कि आवेदिका को 11 फरवरी 2015 से नियमित करने की प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी की जाए, बशर्ते वह संबंधित भर्ती नियमों के तहत पात्र हों। फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि उनकी प्रारंभिक संविदा नियुक्ति को नियमितीकरण के रास्ते में बाधा नहीं माना जाएगा। इस फैसले के बाद लंबे समय से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों के लिए भी यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से ऐसे कर्मचारियों के मामलों में यह निर्णय अहम है, जो स्वीकृत पदों पर विधिवत चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्त हुए हैं और वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
- कोर्ट का आदेश प्राप्त हुआ है। जिसका अध्ययन किया जा रहा है। इस संबंध में मंत्रालय से भी राय ली जाएगी। जिसके बाद कार्रवाई की जाएगी। डॉ. श्रीलॉय मोहंती, पीआरओ, एम्स।