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चारों तरफ पानी ही पानी, पहाड़ी पर भूखे-प्यासे बैठे लोग

Wed, 10 Sep 2014 03:05 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, लक्सर
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जम्मू कश्मीर में कहर बरपाती बाढ़ में रुड़की के लक्सर क्षेत्र के लोग और उनके रिश्तेदार फंसे हुए हैं। दो दिन से भूख और प्यास से जूझ रहे इन लोगों ने फोन कर अपना दर्द बयां किया तो परिजनों के आंसु छलक आए। लक्सर निवासी पुत्तन का भाई शमी उर्फ भूरा अपने परिवार के साथ लाल चौक कश्मीर के पास चाय की दुकान चलाता है।
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पुत्तन ने बताया कि दो दिन पहले आई बाढ़ में शमी का मकान और दुकान पानी में डूब गए थे। उस समय तो वह बच्चों को सुरक्षित स्थान पर छोड़ आया था, लेकिन दुकान पर कुछ सामान बचाने के प्रयास में वह पानी में फंस गया, तब से उसका कोई पता नहीं चल पा रहा है।

पुत्तन के दामाद सलाउद्दीन, समधी हाजी अमीर तथा उनके परिवार के अन्य सदस्य फरमान, मक्की आदि (मूल रूप से बिजनौर जिले के रहने वाले हैं) डल झील के पास शंकराचार्य वाली पहाड़ी पर दो दिन से भूखे प्यासे फंसे हुए हैं।
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ये लोग डल झील के पास खाने का होटल चलाते हैं, लेकिन दो दिन पहले आई बाढ़ में पूरा होटल बह जाने के चलते उन्होंने अपने आठ-दस कर्मचारियों के साथ पहाड़ी पर चढ़कर जान बचाई।

पुत्तन के अनुसार, सलाउद्दीन ने मंगलवार शाम उन्हें फोन करके बताया कि चारों तरफ पानी ही पानी भरा पड़ा है और वह भूखे प्यासे पहाड़ी पर बैठे हुए हैं। अभी तक उनके पास कोई भी सरकार मदद नहीं पहुंची है।
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सलामती के लिए मस्जिदों में दुआ

अपनों का दर्द सुनकर पूरा परिवार गमजदा हो गया है। उनकी सलामती के लिए मस्जिदों में दुआ कराई गई। साथ ही सीएम से संपर्क साधकर आग्रह किया कि मुसीबत में फंसे इन लोगों को बचाने के लिए केंद्र एवं जम्मू कश्मीर सरकार से संपर्क कर उनकी जान बचाई जाए।

मंगलौर के मोहल्ला पीरगढ़ी के खरादी समुदाय के कई परिवारों में इन दिनों बेहद परेशानी भरा माहौल है। कारण कश्मीर गए यहां के कई युवक वहां बाढ़ में फंस गए हैं। संपर्क नहीं होने से उनके परिजनों का बुराहाल है।

उनका कहना है कि उत्तराखंड सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए ताकि वहां फंसे युवकों को वापस लाया जा सके। मोहल्ले के जुल्फकार और उसका भाई अबरार के अलावा तस्लीम, वसीम, नदीम, इरशाद एवं शाहनवाज काम के लिए श्रीनगर (कश्मीर) गए हुए हैं।

शाहनवाज की पत्नी शमशीदा के अनुसार, ईद पर वह घर आए थे। लेकिन पिछले तीन दिनों से उनसे संपर्क नहीं हो रहा है। अबरार की पत्नी सायरा का भी यही कहना है। पति की खैर सलामती नहीं मिलने से उसका बुराहाल है।

तस्लीम की पत्नी फरजाना तो बार बार बेहोश हो कर गिर रही है। इरशाद, वसीम एवं नदीम के परिजनों का भी बुराहाल है। उनका कहना है कि जब से कश्मीर में बाढ़ आई हैं, उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है।

परिवार के लोग कश्मीर में आई बाढ़ में फंसे अपने लोगों की सलामती की दुआएं मांग रहे हैं। पालिका अध्यक्ष चौधरी इस्लाम ने इन परिवारों को साथ ले जाकर मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलवाने का भरोसा दिया है।
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