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10 रुपए के स्टांप पर चल रहा ‘कानूनी’ फर्जीवाड़ा

Tue, 10 Feb 2015 11:01 AM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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वाहन पंजीकरण अपने नाम हस्तांतरित करना हो या जमीन, मकान का सौदा करना हो। नया लाइसेंस बनवाना हो या स्कूल-कॉलेज में दाखिला लेना हो। काम कुछ भी हो, दस रुपए के स्टांप पेपर पर नोटरी की ओर से जारी शपथपत्र लगाना अनिवार्य होता है।
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राजधानी में कुछ धंधेबाजों ने इस अनिवार्यता को फर्जीवाड़े का जरिया बना लिया है। दून में ऐसे ब्लैंक स्टांप आसानी से खरीदे जा सकते हैं, जिन पर केवल ‘शपथपत्र’ लिखा होता है। इन पर नोटरी की मोहर और हस्ताक्षर पहले से दर्ज होते हैं। इससे ये शपथपत्र कानूनी तो लगते हैं, लेकिन होते फर्जी हैं।

इनके माध्यम से कोई भी किसी का मकान-जमीन अपने नाम करा सकता है। फर्जी व्यावसायिक अनुबंध बनाकर किसी को भी करोड़ों का चूना लगा सकता है। इस तरह के शपथपत्र खरीदने वालों का नाम-पता दर्ज नहीं होने से धोखे की स्थिति में उनका पता लगाना मुश्किल होगा।
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अमर उजाला के हाथ लगा स्टांप
सोमवार को अमर उजाला को ऐसा ही एक ब्लैंक स्टांप मिला। एक व्यक्ति ने कचहरी परिसर में स्टांप पेपर अमर उजाला को दिया। दस रुपए के इस स्टांप पेपर पर ऊपर शपथपत्र लिखा है। शपथपत्र अध्यक्ष और सचिव दून ट्रैकर जीप समिति को संबोधित है।

लेकिन इसमें कोई अन्य जानकारी, शपथकर्ता का नाम-पता आदि नहीं है। यानी, खरीदने वाला इस पर जो चाहे नाम-पता भर ले और जो मन हो जानकारी दर्ज कर ले। स्टांप पर नोटरी के रजिस्ट्रार की मोहर और हस्ताक्षर पहले से है। खरीदने वाले ने बताया कि इस तरह के स्टांप कचहरी में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। दस रुपये के स्टांप के 200 रुपए तक वसूले जाते हैं।

ऐसे हो सकता है धोखा
- शपथपत्र में कोई भी कुछ भी लिखा जा सकता है
- करोड़ों की जमीन, मकान के अनुबंध हो सकते हैं
- लाइसेंस, वाहन पंजीकरण में फर्जी नाम-पते दिए जा सकते हैं
- अवैध तरीके से जन्म, मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल किए जा सकते हैं

शपथपत्र जारी करने की प्रक्रिया
नियमानुसार शपथपत्र के लिए पहले शपथकर्ता को स्टांप पेपर लेना होता है। स्टांप लेने वाले व्यक्ति का पूरा नाम और पता स्टांप विक्रेता के रजिस्टर में दर्ज होता है। स्टांप विक्रेता स्टांप लेने वाले के हस्ताक्षर भी रजिस्टर में दर्ज कराता है।

शपथपत्र पर नाम-पता और संबंधित विवरण भरने के बाद नोटरी के समक्ष सत्यापित कराया जाता है। नोटरी तभी मोहर और हस्ताक्षर कर सकता है, जब संबंधित व्यक्ति उसके समक्ष उपस्थित हो।

नोटरी की मोहर लगे ऐसे स्टांप पेपरों से बड़े फर्जीवाड़े का अंदेशा है। या तो नोटरी की जाली मोहर का इस्तेमाल किया गया है, या कुछ नोटरी इस तरह से गलत काम कर रहे हैं। मामले की जांच होनी चाहिए।
- रामकृष्ण जोशी, अधिवक्ता

यह नोटरी एक्ट का उल्लंघन है। इस तरह से काम नहीं होने चाहिए। ऐसे शपथपत्रों पर कुछ भी लिखकर फर्जीवाड़ा हो सकता है। मामले में दून बार एसोसिएशन की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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- रघुवीर सिंह कठैत, सचिव दून बार एसोसिएशन
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