सहारनपुर से शुरू हुआ रजिस्ट्री फर्जीवाड़ा
पुलिस के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इसमें कोई गिरोह सहारनपुर का भी हो सकता है। इसका कारण है कि ज्यादातर दस्तावेज अब तक सहारनपुर के रिकॉर्ड रूम में ही रखे हुए थे। ऐसे में वहीं पर इन पुराने स्टांप की व्यवस्था गिरोह ने कराई होगी। पुलिस जांच में सामने आया है कि अधिकांश रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा सहारनपुर से ही शुरू हुआ था। पुलिस की जांच अब इस ब्लैक मार्केट की ओर भी घूम गई है। इस गिरोह के कुछ सदस्यों को भी पुलिस जल्द गिरफ्तार कर सकती है।
500 का स्टांप बिकता है लाखों रुपये में
अभी तक देहरादून या आसपास के क्षेत्रों में इतने बड़े पैमाने पर पुराने स्टांप के इस्तेमाल के मामले सामने नहीं आए थे। केवल शपथपत्र विशेष बनाने के लिए पुराने स्टांप के इस्तेमाल होने के मामले सामने आते रहे हैं। दरअसल कुछ लोग पुराने स्टांप की चोरी कर इन्हें कोरा ही रख लेते थे। इसके बाद जरूरत के हिसाब से इन्हें सालों बाद बेचा जाता है। इनके लिए कई गुना तक दाम वसूले जाते थे। बताया जा रहा है कि 500 रुपये के स्टांप के लाखों रुपये तक वसूल किए जाते हैं। इस तरह यदि इस मामले का खुलासा हुआ तो यह करोड़ों रुपये का धंधा हो सकता है।
फर्जी बनाने की भी आशंका, कंप्यूटर की होगी जांच
पुलिस ने कोर्ट में भी इस बात को बताया है कि पुराने स्टांप को फर्जीवाड़ा कर भी बनाया जा सकता है। ऐसे में विरमानी और अन्य सदस्यों के कंप्यूटर व लैपटॉप की जांच भी की जाएगी। पूछताछ में यह भी सामने आ सकता है कि उन्होंने यह स्टांप कहीं और तो नहीं बनवाए हैं। बता दें कि देश में बहुत से ऐसे मामले आए हैं जिनमें पुराने स्टांप छापे गए हैं। अब्दुल करीम तेलगी इसका सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है।
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पुलिस हर दिशा में काम कर रही है। जो भी तथ्य सामने आ रहे हैं उनके हिसाब से कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही कुछ बड़े खुलासे भी होंगे। कुछ और गिरफ्तारियां भी जल्द की जाएंगी। -दलीप सिंह कुंवर, एसएसपी