युवाओं के लिए खुशी, सरकार के लिए चुनौती
सरकारी नौकरियों के खुलने की राह देख रहे राज्य के करीब नौ लाख पंजीकृत बेरोजगारों के लिए विभागों, निगमों व सहायतित संस्थाओं में हजारों खाली पदों की खबर खुशी देने वाली हो सकती है, लेकिन प्रदेश सरकार के लिए हजारों सरकारी नौकरियां खोलना आसान नहीं है। सरकार को अंदाजा है कि वित्तीय चुनौतियों के बीच हजारों सरकारी नौकरियां देने से सरकार का खर्च बढ़ जाएगा।
साल दर साल बढ़ता जा रहा है वेतन खर्च
हाल ही में जारी बजट में सरकार ने राज्य के स्वयं के राजकोषीय सुधार को लेकर जो संकेतक बनाए हैं, उसके अनुसार, सरकार का वेतन का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। 2019-20 में सरकार ने कर्मचारियों के वेतन पर 13054.48 करोड़ रुपये खर्च किए। 2020-21 में उसने 14951 करोड़ का संशोधित खर्च का अनुमान लगाया। 202-23 में अकेले वेतन पर ही 16572 करोड़ रुपये के खर्च आने की संभावना है। यह खर्च 2023-24 में 18 हजार और 204-25 में 20 हजार करोड़ से अधिक तक पहुंचने के आसार हैं।
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दोहरे दबाव में प्रदेश सरकार
उत्तराखंड में बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। राज्य के युवाओं की सरकारी नौकरियों पर लगातार नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का फोकस भी सरकारी महकमों में उन पदों पर भर्ती करने पर है, जिन्हें भरना आवश्यक है। बाकी युवाओं को सरकार स्वरोजगार और आजीविका आधारित योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रेरित कर रही है। सरकार पर दोहरा दबाव है। वह हजारों पदों पर भर्ती खोलकर वित्तीय संकट नहीं बढ़ाना चाहती, लेकिन यह भी नहीं चाहती कि नौकरियों के अभाव में राज्य के युवाओं को भी निराशा का वातावरण बने।