मनरेगा योजना के संचालन को प्रदेश में की जा रही भर्तियों में फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। प्रदेश के कई जिलों में अफसरों, कर्मचारियों ने मिलीभगत कर प्रावधानों के विपरीत भर्तियां कर लीं।
अब यह प्रकरण शासन तक पहुंचा है। ग्राम्य विकास विभाग की ओर से प्रकरण की जांच भी शुरू कर दी गई है। अपर सचिव ग्राम्य विकास युगल किशोर पंत का कहना है कि इस संबंध में कुछ शिकायतें हैं जिसकी जांच कराई जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते है तो सभी भर्तियां निरस्त की जाएंगी। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि मनरेगा को लागू कराने के लिए ब्लाक स्तर पर डिप्टी प्रोग्राम अफसर (डीपीओ), अवर अभियंताओं और ग्राम रोजगार सेवकों की नियुक्ति की जाती है। इन अफसरों, कर्मचारियों को सेवा में लेने के लिए ग्राम्य विकास विभाग की ओर से नियमावली जारी की गई है। लेकिन कई जिलों में नियमों के विपरीत डीपीओ और अवर अभियंताओं की नियुक्तियां कर ली गईं। अब यह प्रकरण शासन तक पहुंचा है।
शिकायतें मिलने पर जांच शुरू कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जिला पंचायत अल्मोड़ा में नियमों के विपरीत 44 लोगों को नौकरी देने का मामला सामने आया था। यह प्रकरण के उजागर होने के बाद शासन स्तर से हुई कार्रवाई में न सिर्फ इन लोगों को हटाना पड़ा, वरन मुख्य नगर अधिकारी को भी अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी।