देहरादून में ग्रुप हाउसिंग बना रहे और कॉलोनी काट रहे कुल 42 बिल्डर्स व कोलोनाइजर्स के प्रोजेक्ट सील किए जाएंगे।
एमडीडीए ने चालान करते हुए उन्हें सीलिंग का नोटिस जारी किया है। इन सभी बिल्डर्स और कोलोनाइजर्स ने पूर्व में भेजे गए नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया था, जिसके बाद उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। एमडीडीए ने इसी वर्ष मार्च में 114 बिल्डर्स व कोलोनाइजर्स को नोटिस जारी किया था।
दरअसल नवंबर 2011 में जारी शासनादेश के अनुसार प्रत्येक ग्रुप हाउसिंग और कॉलोनी के ले आउट प्रोजेक्ट में 10 फीसदी फ्लैट व प्लॉट दुर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए तैयार करने होते हैं। इनका आवंटन संबंधित प्राधिकरण, जिला प्रशासन और संबंधित बिल्डर या कॉलोनाइजर संयुक्त रूप से करते हैं।
30 मार्च 2016 को राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर शासनादेश जारी करते हुए ईडब्ल्यूएस फ्लैट और प्लॉट ना देने वालों को उसकी कीमत के बराबर धनराशि (शेल्टर फंड) संबंधित प्राधिकरण को जमा कराने के निर्देश दिए। जिससे कि संबंधित प्राधिकरण गरीबों के लिए आवासीय परियोजना तैयार कर सके।
प्रत्येक प्राधिकरण और विनियमित क्षेत्र में प्रोजेक्ट पांच साल के लिए मंजूर किया जाता है। बाद में इसे एक-एक साल के लिए तीन बार बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश में 2011 के बाद से स्वीकृत हुए सभी प्रोजेक्ट में इडब्ल्यूएस के निर्माण के लिए 2019 तक का वक्त है।
इसका फायदा उठाते हुए किसी भी प्रोजेक्ट में गरीबों का हिस्सा नहीं छोड़ा गया। मार्च में एमडीडीए ने शासनादेश जारी होने की तिथि के बाद स्वीकृत हुए सभी प्रोजेक्ट की जांच की तो पता चला कि एक भी बिल्डर ने इस महत्वपूर्ण शासनादेश का पालन नहीं किया है। इसके बाद 114 बिल्डर्स और कोलोनाइजर्स को नोटिस जारी किया गया था।
तीन किस्तों में देना होगा पैसा
बिल्डर्स और कोलोनाइजर्स को शेल्टर फंड का पैसा तीन किस्तों में जमा कराना होगा। इसके तहत कुल करीब 20 करोड़ रुपए की धनराशि जमा होनी है। 42 बिल्डरों और कोलोनाइजरों को छोड़कर अन्य ने पहली किस्त के रूप में छह करोड़ रूपए जमा करा दिए हैं। उन्हें शेष करीब 14 करोड़ अगले एक साल के भीतर जमा कराना होगा।
2011 के बाद जिन 114 ग्रुप हाउसिंग और कॉलोनी के नक्शे व ले आउट पास हुए उनमें से किसी ने भी इडब्ल्यूएस का हिस्सा नहीं दिया था। इस पर मार्च में नोटिस जारी किए गए। कुछ ने शेल्टर फंड जमा कराए और कुछ ने रिवाइज्ड मैप जमा करवाए हैं। 42 प्रोजेक्ट में कोई जवाब ना मिलने पर चालान कर सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है।
- प्रकाश चंद्र दुमका, सचिव, एमडीडीए