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उत्तराखंड: सवालों के पहाड़ में गुम पहाड़ का सवाल

Sat, 03 Dec 2016 10:37 AM IST
राकेश खंडूड़ी/अमर उजाला, देहरादून
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uttarakhand assembly
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तमाम सियासी घटनाओं की गवाह रही मौजूदा विधानसभा में पिछले पांच साल के दौरान विधानसभा सदस्यों ने सदन में 9128 प्रश्न पूछे। अब तक तीन निर्वाचित विधानसभाओं में पूछे गए प्रश्नों की यह रिकॉर्ड संख्या है। लेकिन, सदन के भीतर सदस्यों द्वारा खड़े किए गए इन सवालों के पहाड़ में पहाड़ का सवाल गुम ही रहा।
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राज्य अवधारणा से जुड़े बुनियादी प्रश्न अब भी निरुत्तर हैं, हालांकि पहाड़ से हो रहे पलायन, बढ़ती बेरोजगारी, आपदा में तबाह गांवों का पुनर्वास, डॉक्टरों की कमी से जुड़े प्रश्न सदन के भीतर उठे तो, लेकिन हंगामे के शोर में इनकी गूंज अनसुनी रह गई।

चुनाव की मुनादी होने से पहले ही सियासी दल और उनके नेता मैदान में उतर चुके हैं। वे जनता से वोटों की दरकार कर रहे हैं। वादे कर रहे हैं कि वे उन्हें ही चुने क्योंकि उनकी समस्याओं के सबसे बेहतर समाधान उनके पास है। राज्य की प्रजा ने बारी-बारी से उन्हें विधानसभा में इस उम्मीद भेजा कि वे राज्य अवधारणा के मूल प्रश्नों के हल निकालेंगे। विधानसभा में उनके सवालों के उत्तर तलाशे जाएंगे। मगर सवालों का पहाड़ खड़ा हो गया मगर पहाड़ के सवाल हल नहीं हो सके।
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पहाड़ से पलायन बन गया है चुनौती

डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं पहाड़
आज भी राज्य में 50 फीसद से ज्यादा डॉक्टरों की कमी है। आपदाओं के झंझावतों से असुरक्षित गांवों की संख्या 400 का आंकड़ा पार कर चुकी है। खुद सरकार मान चुकी है कि 70 से ज्यादा गांवों अत्यंत संवेदनशील हैं जिन्हें अन्यत्र बसाना होगा। पौड़ी और अल्मोड़ा में पिछले एक दशक में आबादी कम हो चुकी है। गैरआबाद गांवों की संख्या में इजाफा हो रहा है। ये सभी वे सवाल है जिनके हल के लिए ये राज्य बना था।

मगर क्षेत्रीय, जातीय एवं राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के चलते ये सारे सवाल मौजू होने के बावजूद अनुत्तरित हैं। जिन्हें जनता ने विस में भेजा उनके उठाए गए हजारों सवालों में जवाब नहीं है।
 
अलबत्ता विधानसभा से प्राप्त दस्तावेजों के तुलनात्मक अध्ययन से ये तथ्य भी उजागर हुआ कि अपने कार्यकाल के दौरान कुछ सदस्यों ने प्रश्नों के जरिए अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को लेकर खूब सक्रियता दिखाई तो कुछ इस अवसर का खास लाभ नहीं उठा सके।
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पिछले पांच वर्ष में पूछे गए रिकॉर्ड सवाल

विधानसभा में मुख्यमंत्री हरीश रावत - फोटो : अमरउजाला
सदन में पिछले पांच वर्ष के दौरान कुल 14 सत्रों के दौरान सबसे ज्यादा 9,128 प्रश्न पूछे गए। ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इससे पूर्व 2002 से 2006 के दौरान विस में 8536 प्रश्न पूछे गए थे और 2007 से 2011 के दौरान 5724 प्रश्न सदन पटल पर आए थे।

विधानसभा की कार्यवाही में प्रश्नकाल सबसे अहम होता है। खासतौर पर विपक्षी सदस्य सरकारी सिस्टम को कठघरे में खड़ा करने के लिए इसका भरपूर इस्तेमाल करते हैं, लेकिन, सर्वाधिक प्रश्न पूछने का रिकॉर्ड सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायक ललित फर्सवाण के नाम है। कपकोट के इस विधायक ने कुल 786 प्रश्न पूछे। सवाल पूछने के मामले में, भाजपा विधायक दलीप सिंह रावत, मदन कौशिक, गणेश जोशी, माल चंद, महावीर सिंह रांगड, पूरन फर्त्याल 300 से ज्यादा प्रश्न पूछने वाले सदस्यों में शामिल हैं। 

प्रश्न पूछने में अव्वल
ललित फर्सवाण(कपकोट)-786
सुरेन्द्र सिंह जीना(सल्ट)-  759
नवप्रभात(विकासनगर)- 605
दलीप सिंह रावत(लैंसडौन)-537

प्रश्न पूछने में फिसड्डी
राजकुमार(राजपुर रोड)- 0
उमेश काऊ(पूर्व विधायक)-0
दिनेश धनै (बतौर विधायक)- 10
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