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विधानसभा चुनावः हैवीवेट प्रत्याशियों की हवा बिगाड़ रहे बागी

Wed, 08 Mar 2017 02:00 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : file photo
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भाजपा में सीएम बनने की रेस में शामिल कई हैवीवेट प्रत्याशी अपनी सीटों पर बगावत की चुनौती का सामना कर रहे हैं। इन दिग्गजों की राह में कांग्रेस के साथ अपनी पार्टी के निर्दलियों ने भी रोड़े अटका दिए हैं। कुछ सीटों पर तो निर्दलियों का उतरना प्रायोजित होने की भी चर्चा है।
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पार्टी के डैमेज कंट्रोल तंत्र के लिए 31 जनवरी तक की डेडलाइन है, जिसके बाद नामांकन वापस नहीं हो सकता। सूत्रों की मानें तो पार्टी केंद्रीय नेतृत्व ने डैमेज कंट्रोल तंत्र को लेकर नाराजगी जताई है। अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बागियों को मनाने की सीधी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

चौबट्टाखाल विधानसभा से विधायक तीरथ रावत का टिकट काट पार्टी ने हैवीवेट सतपाल महाराज को उतारा है। चुनाव लड़ रहे विधायकों में महाराज पार्टी के सबसे बड़े पोस्टर ब्वॉय बने हुए हैं। पार्टी भले ही तीरथ को समझाने में कामयाब हुई, लेकिन कविंद्र इष्टवाल को नामांकन दाखिल करने से नहीं रोक पाई।
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इष्टवाल नामांकन वापस लेने से इनकार कर रहे हैं, जिससे महाराज के सामने कांग्रेस के साथ बागी प्रत्याशी भी चुनौती बनता दिख रहा है। प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को कई जिम्मेदारी देकर पार्टी हैवीवेट साबित कर चुकी है। लेकिन उनकी सीट पर भाजपा के बागी प्रमोद नैनवाल खुद और पत्नी हिमानी का भी नामांकन दाखिल करवा चुके हैं। भट्ट अभी तक नैनवाल को समझा नहीं पाए हैं।

डोईवाला सीट से त्रिवेंद्र रावत अपनी सीट पर बगावत थामने में कामयाब दिख रहे हैं, लेकिन उनके सीट पर भितरघात की आशंका दिख रही है। वर्ष 2014 विधानसभा उपचुनाव में त्रिवेंद्र के हारने की वजह भितरघात ही मानी गई थी। पिथौरागढ़ सीट से प्रकाश पंत के खिलाफ पार्टी के बागी ने निर्दलीय नामांकन तो नहीं भरा है, लेकिन दावेदार सुरेश जोशी के समर्थक पूरी तरह उनके साथ नहीं आए तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

डैमेज कंट्रोल तंत्र की राह मुश्किल
पार्टी को कई अहम सीटों पर बागियों के निर्दलीय नामांकन करने से डैमेज कंट्रोल तंत्र की पोल खुल गई है। प्रदेश में डैमेज कंट्रोल के लिए प्रदेश चुनाव प्रभारी जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान, प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू सहित पूर्व मुख्यमंत्रियों की टीम है। टीम के पास अब रूठों को मनाकर नामांकन वापस करवाने के लिए केवल 31 जनवरी तक का समय है। 1 फरवरी को नाम वापसी की अंतिम तिथि है।

कांग्रेस से आए दिग्गजों में यशपाल आर्य की बाजपुर सीट पर कांग्रेस के टिकट पर सुनीता टम्टा का नामांक न कर चुकी है, जिनको मनाना संभव नहीं दिख रहा। जसपुर सीट पर पार्टी प्रत्याशी शैलेंद्र मोहन सिंघल के खिलाफ भाजपा की प्रदेश पदाधिकारी विनय रोहेला और सीमा चौहान निर्दलीय नामांकन भर प्रदेश नेतृत्व के लिए चुनौती बनी हुई हैं। केदारनाथ से पार्टी प्रत्याशी शैला रानी रावत के खिलाफ बागी आशा नौटियाल, देवप्रयाग से बागी दिवाकर भट्ट ने पार्टी प्रत्याशी विनोद कंडारी के खिलाफ नामांकन दाखिल किया है।

इन दोनों को मनाना बड़ी चुनौती है। गंगोत्री सीट पर गोपाल रावत के खिलाफ सूरत राम नौटियाल किसी भी सूरत में नामांकन वापस लेने को तैयार नहीं है। कुमाऊं में भाजपा के कई बार के विधायक बंशीधर भगत की सीट कालाडूंगी पर निर्दलीय हरेंद्र सिंह तो श्रीनगर से पार्टी प्रत्याशी धन सिंह रावत की सीट पर मोहन काला का नामांकन वोट के गणित को बिगाड़ सकता है। बताया जा रहा है कि काला भाजपा से टिकट की उम्मीद में थे। काशीपुर से हरबजन सिंह चीमा के खिलाफ निर्दलीय उतर कर पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल समीकरण बिगाड़ रहे हैं।
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