मौसम केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार यह मौसम में आए बदलावों के बाद की स्वाभाविक स्थिति है, जिसमें अक्सर धुंध की स्थिति बनी रहती है। उन्होंने बताया कि हवा में नमी का स्तर बढ़ने और दिशा में बदलाव होने पर धुंध बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि पराली पिछले काफी समय से जलाई जा रही है। साथ ही प्रदूषण के सभी कारक भी पहले से ऐसे ही सक्रिय हैं। ऐसे में उनको कारण नहीं माना जा सकता है। उन्होंने बताया कि आज भी मौसम की यही स्थिति बनी रहने का अनुमान है।
बताया कि रविवार को नॉर्थ वेस्ट विंड मजबूत होगी, जिससे धुंध छंट जाएगी। हालांकि इसके बाद 21 और 22 नवंबर को एक बार फिर मौसम में बदलाव होगा, जिससे इन दो दिनों में भी धुंध छाई रह सकती है।
नॉर्थ वेस्ट विंड के कमजोर होने और हवा में नमी बढ़ने से धुंध की स्थिति पैदा हुई है। रविवार से मौसम साफ हो जाएगा और ज्यादातर स्थानों पर धूप खिली रहेगी। पराली का धुआं एक बहुत छोटा कारण हो सकता है, लेकिन इसे धुंध की असली वजह नहीं माना जा सकता है।
- बिक्रम सिंह, निदेशक, मौसम केंद्र