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यहां दम तोड़ रहा PM मोदी स्वच्छ भारत मिशन, हो रहा सरकारी धन का दुरुपयोग

Fri, 23 Jun 2017 08:58 AM IST
अमरनाथ/प्रवीन कोहली, अमर उजाला, खटीमा
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sarpuda village - फोटो : amar ujala
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के गांव में उनका महत्वाकांक्षी मिशन ‘स्वच्छ भारत’ दम तोड़ रहा है। सांसद भगत सिंह कोश्यारी के गोद लिए गांव सरपुड़ा बग्घा-54 में सालभर से जैसे-तैसे शौचालयों का निर्माण कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है, फिर भी न तो सांसद को इसकी चिंता है, न अफसरों को।
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इस आदर्श गांव में बने शौचालयों का ‘आदर्श’ देखकर हर कोई हैरान होगा। खास बात यह कि गांव का प्रधान ही मनमाने तरीके इन शौचालयों को बनाने में जुटा है, जो ग्रामीणों को रास नहीं आ रहा है। अनेक ग्रामीणों ने इन घुटन भरे शौचालयों में जाना छोड़ दिया है। 
  
अधिकारियों के मुताबिक सांसद आदर्श ग्राम सरपुड़ा बग्घा-54 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 822 शौचालय स्वीकृत हैं। स्वजल परियोजना के तहत ग्राम प्रधान एक एनजीओ के माध्यम से इनका निर्माण स्वयं करा रहे हैं।
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इन शौचालयों को देखकर ऐसा लगता है कि केवल खानापूर्ति के लिए निर्माण कराया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। उनका आरोप है कि खुद निर्माण की इच्छा जताने बावजूद प्रधान मनमानी तरीके निर्माण कार्य रहा है। ग्राम प्रधान अतीक अहमद ने भी माना है कि एनजीओ द्वारा बनाए गए शौचालय मानकों के अनुरूप नहीं हैं। हालांकि उनका दावा है कि उनके बनाए शौचालय मानकों के अनुरूप हैं।
      
स्वजल परियोजना ने 12000 रुपये प्रति शौचालय के हिसाब से करीब 400 शौचालयों की धनराशि ग्राम पंचायत के खाते में ट्रांसफर करा दी है। दावा किया गया है कि शेष 422 शौचालयों का निर्माण भी पूरा हो गया है, लेकिन धरातल पर कई शौचालयों के निर्माण अधूरे पड़े हैं। कई गिरने की कगार पर हैं। भुगतान होने से पहले ही कई शौचालयों के टैंक भर गए और कई के दरवाजे टूट गए। कच्ची ईंट, लोकल बालू, कम सीमेंट से बने इन शौचालयों को देखकर ऐसा लगता है कि शायद ही ये सालभर टिक पाएं। हैरानी भरी बात यह है कि परियोजना अधिकारी शौचालयों के निर्माण का सर्वे भी कर चुके हैं और कागजों में उसे सही दिखा चुके हैं। 

इस तरह की अनियमितताएं मिलीं 

toilet
अमर उजाला टीम जब गांव पहुंची तो पता चला कि शौचालय की ऊंचाई और लंबाई-चौड़ाई इतनी कम है कि एक सामान्य व्यक्ति उसमें आसानी से जा नहीं सकता।

बग्घा गांव में चंद्रा देवी, बहादुर सिंह धामी के शौचालय मात्र पांच फुट ऊंचाई के बनाए गए हैं। शौचालय में सामान्य कदकाठी का व्यक्ति अंदर खड़ा होना तो दूर अंदर बाहर नहीं हो सकता। सीट पर बैठने में उसके दोनों हाथ दीवारों से टकराते हैं। बद्री प्रसाद, नगीना प्रसाद, जोगेंद्र प्रसाद के शौचालय की लंबाई चौड़ाई मानक से बेहद कम है। दो शौचालयों के दरवाजे की प्लास्टिक की पतली चादर फट गई है। बंडिया लाइन में विजय कुमार, राम लक्षन, राजकुमार के शौचालय बनने के साथ ही क्षतिग्रस्त हो गए।

एक शौचालय की छत गिर गई, दूसरे में प्लास्टर नहीं है, तीसरे में सीट ही नहीं लगी है। जय प्रकाश के शौचालय में न तो टैंक बना है और न ही सीट लगी है। शौचालयों की यह स्थिति पूरे बग्घा गांव में है। केवल सरपुड़ा गांव में सड़क किनारे बने घरों में कुछ शौचालयों की ऊंचाई छह फुट मिली। वहां के लाभार्थियों का कहना है कि उन्होंने इसके लिए अपनी ईंटे दीं, तब ऐसा बना है। 
      
मिशन का मकसद खुले में शौच की प्रथा को हटाना 
आपको बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य शौचालय विहीन परिवार के सदस्यों को सरकार की ओर से शौचालय की सुविधा देकर खुले में शौच की प्रथा हटाना है। शौचालय के निमार्ण और उसके उपयोग, साफ-सफाई और उचित जल प्रबंधन के लिए सरकार की ओर से लाभार्थी के खाते में 12000 रुपये दिए जाते हैं। मनरेगा से भी शौचालय निर्माण के लिए धनराशि का प्रावधान है।  
         
शौचालय निर्माण के मानक 
स्वजल परियोजना द्वारा तय मानक के मुताबिक शौचालय की ऊंचाई साढ़े छह फुट होनी चाहिए। अंदर की लंबाई-चौड़ाई साढ़े तीन-साढ़े तीन फुट होनी चाहिए। शौचालय के टैंक साढ़े पांच फुट गहरे व एक मीटर लेंबे और इतने ही चौड़े होने चाहिए, लेकिन बग्घा 54 में कई शौचालयों की ऊंचाई मात्र पांच फुट, अंदर की लंबाई-चौड़ाई ढाई गुणा ढाई फुट, टैंक तीन-तीन फुट के डाले गए हैं। दीवारों में दोयम दर्जे की ईंटे लगी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आधा कट्टा सीमेंट में ही पूरा शौचालय तैयार कर दिया गया है।       
 
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बहुत से परिवार शौचालय से वंचित    

toilet
सरपुड़ा बग्घा 54 ग्राम पंचायत में बहुत से परिवार आज भी शौचालय से वंचित हैं। ये लोग स्वयं शौचालय बनवाना चाहते हैं, लेकिन ग्राम प्रधान उनके खाते में धनराशि नहीं डाल रहे हैं। गांव के ही सुराली प्रजापति, शिवलाल प्रजापति, जय प्रकाश प्रजापति, जगदीश प्रसाद, रमेश माली, अमरजीत, राम प्रकाश बहादुर सिंह, पुष्कर नेगी, विदेशी, धर्मावती आदि ऐसे ग्रामीण मिले जो स्वयं शौचालय बनाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ग्राम पंचायत धनराशि नहीं दे रही है।   

जांच के बाद ही होगा भुगतान
सरपुड़ा बग्घा 54 ग्राम पंचायत में 822 शौचालय स्वीकृत हैं, जिनमें अभी तक 400 शौचालयों के निर्माण का भुगतान किया जा चुका है। शेष 422 के पूरा होने का दावा किया गया है। एक टीम ने शौचालयों का हाल में सर्वे किया है, लेकिन जांच के बाद इनका भुगतान होगा।        
- भीम सिंह, परियोजना अधिकारी, स्वजल योजना  
 
एनजीओ के गड़बड़ी करने पर स्वयं कराया निर्माण 
शौचालयों के निर्माण में एक एनजीओ ने गड़बड़ी की, जिसके बाद उसे हटा दिया गया। अब स्वयं निर्माण करा रहे हैं। 70 शौचालय अभी अधूरे हैं, जिसकी धनराशि बाकी है। उसके आते ही बाकी शौचालयों का निर्माण भी कराया जाएगा। मेरे द्वारा बनाए सभी शौचालय मानक के अनुरूप हैं।  
- अतीक अहमद,  ग्राम प्रधान, सरपुड़ा बग्घा 54
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