इंसान की पहचान उसके कर्म से होती है। वर्तमान की अच्छाइयां अतीत की कड़वी यादों को भुला जरूर देती हैं, लेकिन पीछा नहीं छोड़ती। जिला कारागार का कैदी नंबर 923 राकेश ऐसा ही एक उदाहरण है।
राकेश हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। राकेश ने अपने कर्म से जेल के बंदियों से लेकर जेल अधीक्षक और कर्मचारियों को शिष्य बना दिया है। हर कोई उसकी योग प्रशिक्षक की प्रतिभा का कायल है और उसके इशारों पर योग करता है।
राकेश योग का बेहतरीन प्रशिक्षक है। बंदियों और कैदियों को रोजाना सामूहिक योग कराता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जेल प्रशासन ने उसे सम्मानित किया है।