मुख्यमंत्री के सचिव मोहम्मद शाहिद के कथित स्टिंग ऑपरेशन से पूरे उत्तराखंड में हलचल है, लेकिन इसके पीछे का सच कुछ और है।
सियासी उलझन बने शराब के कारोबार के इस घटनाक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत अकेले पड़ गए। सीएम को जहां दिन भर कांग्रेस का अप्रत्यक्ष असहयोगात्मक रवैये से मुखातिब होना पड़ा, वहीं दिल्ली से दून तक भाजपा की आक्रामकता को भी झेलना पड़ा।
सीएम को स्टिंग से कम, भाजपा से गर्म रुख से ज्यादा खतरा नजर आ रहा था। कांग्रेस प्रवक्ता ने दिल्ली में ही मोहम्मद शाहिद को सस्पेंड करने की बात कहकर हरीश रावत को और असहज कर दिया। यह बात कम ही लोग जानते है कि मुख्यमंत्री व उनके नजदीकी और टॉप ब्यूरोक्रेसी को भी इस स्टिंग की खबर थी।
आईएएस मोहम्मद शाहिद का यह स्टिंग विगत फरवरी माह में हुआ बताया जा रहा है। इतनी उलझन सरकार और कांग्रेस में रही कि इस बात पर किसी ने सवाल नहीं किया कि स्टिंग को छह महीने के बाद सामने क्यों लाया गया। हर बात पर बयानबाजी करने वाले कांग्रेस के बयानवीर चुप्पी साध गए और सरकार अकेली पड़ गई।