रस्सी पर लटकती जिंदगी। जरा सी चूक और खेल खत्म। दर्शकों की एक टक नजर केवल रस्सी पर कारनामे दिखा रही लड़की पर। दर्शकों के चेहरे पर लड़की के कारनामें देख एक डर सा दिखता। उसके हर एक खतरनाक कारनामे पर दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट उसमें और बेहतर करने का उत्साह पैदा करती। लेकिन इस हंसते चेहरे के पीछे दर्दनाक सच छिपा है।
कारनामे दिखाते समय उसमें कोई डर नहीं होता और ना ही आत्मविश्वास की कमी। लेकिन सर्कस में खाली पड़ी कुर्सियां उसकी मनोबल गिरा देती। अपनी जिंदगी को खतरे में डाल दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ला रहे द रॉयल सर्कस में रस्सी के सहारे जिमनेस्टिक कर रही मंगोलियन की 19 वर्षीय ओथगो कहती है कि मेरा उत्साह तब बढ़ जाता है जब मैं देखती हूं कि सारे लोगों की निगाहें मुझ पर है।
यह मेरा हौसला बढ़ाती है। हममें आत्मविश्वास तब कम होता है। जब हमारी मेहनत पर शाबासी देने के लिए दर्शक नहीं होते। वही होलाहोवा, पंबूक (कई रिंग को अपनी बॉडी के सहारे घूमाना) का कारनामे दिखा रही 25 वर्षीय चिमगा का कहना है कि दर्शकों की संख्या दस हो सौ हम उतने ही उत्साह और मेहनत से दिखाते हैं।