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सर्कसः दर्दनाक है इन हंसते चेहरों के पीछे छिपा ये सच

Mon, 25 May 2015 04:06 PM IST
रेनू सकलानी/ अमर उजाला, देहरादून
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रस्सी पर लटकती जिंदगी। जरा सी चूक और खेल खत्म। दर्शकों की एक टक नजर केवल रस्सी पर कारनामे दिखा रही लड़की पर। दर्शकों के चेहरे पर लड़की के कारनामें देख एक डर सा दिखता। उसके हर एक खतरनाक कारनामे पर दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट उसमें और बेहतर करने का उत्साह पैदा करती। लेकिन इस हंसते चेहरे के पीछे दर्दनाक सच छिपा है।
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कारनामे दिखाते समय उसमें कोई डर नहीं होता और ना ही आत्मविश्वास की कमी। लेकिन सर्कस में खाली पड़ी कुर्सियां उसकी मनोबल गिरा देती। अपनी जिंदगी को खतरे में डाल दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ला रहे द रॉयल सर्कस में रस्सी के सहारे जिमनेस्टिक कर रही मंगोलियन की 19 वर्षीय ओथगो कहती है कि मेरा उत्साह तब बढ़ जाता है जब मैं देखती हूं कि सारे लोगों की निगाहें मुझ पर है।

यह मेरा हौसला बढ़ाती है। हममें आत्मविश्वास तब कम होता है। जब हमारी मेहनत पर शाबासी देने के लिए दर्शक नहीं होते। वही होलाहोवा, पंबूक (कई रिंग को अपनी बॉडी के सहारे घूमाना) का कारनामे दिखा रही 25 वर्षीय चिमगा का कहना है कि दर्शकों की संख्या दस हो सौ हम उतने ही उत्साह और मेहनत से दिखाते हैं।
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घाटे में पड़ा लाखों के बजट का द रॉयल सर्कस

चिमगा का कहना है कि देहरादून में दर्शकों की संख्या देख उत्साह में कमी जरूर हो रही है। मंगोलियन में सर्कस के लोग बहुत प्रेमी है। परेड में ग्राउंड चल रहे द ग्रेट रायल सर्कस को 22 दिन हो चुके हैं। लेकिन सर्कस को उसके अच्छे दर्शक नहीं मिल पा रहे है। इससे विदेशी कलाकार मायूस हो रहे है।

लाखों के बजट में दून के दर्शकों के लिए तैयार किए गए द रॉयल सर्कस अब तक का सबसे बड़ा सर्कस है। 2004 से दून में सर्कस का आयोजन कर रहे एरिया मैनेजर श्याम थापा का कहना है कि मैं खुद हैरान हूं कि अब तक का सबसे बड़ा और बेहतर सर्कस घाटे में जा रहा है।

ऐसे कलाकार और प्रस्तुतियां इससे पहले किसी सर्कस में नहीं लाए गये। कहा अधिक गर्मी होने और स्कूल की छुट्टियां नहीं पड़ने से ही ज्यादा सर्कस का रंग फीका पड़ रहा है।

दिन के तीन शो से भी नहीं हो रही आधी कमाई
दस लाख रुपए में द रायल सर्कस को तैयार किया गया है। सर्कस में प्रतिदिन का खर्चा एक लाख रुपए है। दिन के तीन शो से खर्च हो रही कमाई भी वसूल नहीं हो पा रही है। साथ ही प्रबंधन को जमीन का सात हजार रुपए सरकार को देना होता है। इसमें सर्विस टैक्स अलग है।
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