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स्कंद पुराण से मिला कैलास मानसरोवर का एक और रास्ता

Mon, 25 May 2015 04:06 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/ अमर उजाला, चंपावत
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चीन से समझौते के बाद इस बार कैलास-मानसरोवर यात्रा के एक नए रास्ते (नाथूला दर्रा) का श्रीगणेश होने जा रहा है।
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कुमाऊं के पुराने रास्ते के अलावा जून से शुरू होने वाली यह यात्रा नाथूला दर्रा से भी आगे बढ़ेगी, लेकिन चंपावत के रास्ते जाने वाली कैलास यात्रा की राह लंबे अरसे से बंद है।

यह मार्ग खुलता तो चंपावत के लोगों को भी लाभ मिलता और यात्रियों को कई पौराणिक मंदिरों के दर्शन करने का मौका मिलता है। कैलास यात्रा का हिस्सा रहे चंपावत यात्रापथ का उल्लेख स्कंद पुराण में भी है।
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इतिहासकार महाविद्यालय के रिटायर्ड प्राचार्य मदन चंद्र भट्ट का कहना है कि कैलास-मानसरोवर यात्रा का चंद राजाओं की राजधानी रहे चंपावत से गहरा संबंध रहा है। यात्री यहां बालेश्वर और मानेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करते थे।

जिसका स्कंद पुराण के मानसखंड के 11वें अध्याय में उल्लेख है। इसमें मानस यात्रा प्रवेश निर्गम में चंपावत का उल्लेख है। मानसरोवर का मुख्य मार्ग बालेश्वर, मानेश्वर और रामेश्वर के मंदिरों से होकर गुजरना बताया गया है।

1962 से पूर्व तक इस यात्रा का चंपावत अहम पड़ाव था। युद्ध के बाद दो दशक तक यात्रा बंद रही। 1981 में यात्रा की दोबारा शुरुआत के बाद इसका जिम्मा कुमाऊं मंडल विकास निगम को सौंपने के साथ ही यात्रा मार्ग बदल कर अल्मोड़ा होते हुए कर दिया गया।
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1958 तक चंपावत से था कैलास यात्रा का रूट

यात्रा में 13 बार ड्यूटी कर चुके केएमवीएन के साहसिक पर्यटन प्रभारी दिनेश गुरुरानी बताते हैं कि 1958 तक इस यात्रा का रूट चंपावत से गुजरता था। रूट बदलने की दलील बरसात में रोड बंद होना दी गई। जिला पर्यटन अधिकारी एसएस यादव का कहना है कि फिलहाल रूट बदलकर चंपावत से कराए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।

एक बार रहा वापसी का रूट
1962 के बाद चंपावत रूट से यात्रा की आवाजाही कभी नहीं हुई, लेकिन इसके बाद एक बार इस मार्ग से वापसी जरूर हुई। विदेश मंत्रालय ने 2002 में यात्रा की वापसी यहीं से तय की, लेकिन एक वर्ष बाद ही वापसी के इस मार्ग को भी भी हटा दिया गया।

मान्यताओं पर भी सवाल
यात्रा रूट मानसखंड के मुताबिक नहीं होना धार्मिक मान्यता पर भी सवाल उठाता है। इससे मां पूर्णागिरि धाम सहित चंपावत जिले के तीर्थस्थलों को पहचान के लिए तरसना पड़ता है।

इस धार्मिक यात्रा के रूट को पौराणिक ग्रंथ मानसखंड के अनुरूप कराने के लिए हिंदूवादी सगठन सामूहिक पहल करेंगे। इसके लिए भारत सरकार को अनुरोध पत्र भेज इसकी शुरुआत करेंगे।
- चंद्र किशोर बोहरा, प्रदेश अध्यक्ष, हिंदू जागरण मंच

कैलास-मानसरोवर यात्रा का चंपावत पौराणिक मार्ग रहा है। इस पुरातन रूट को शुरू करवाने के लिए राज्य सरकार के माध्यम से प्रस्ताव भारत सरकार को भिजवाएंगे।
- हेमेश खर्कवाल, विधायक, चंपावत
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