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रियल लाइफ के ऋतिक को सलाम

Wed, 24 Jul 2013 08:27 AM IST
संदीप थपलियाल
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ऋतिक! नाम सुनकर आपको लग रहा होगा कि फिल्म स्टार ऋतिक रोशन की बात हो रही है। ऐसा नहीं है। हम जिस ऋतिक की बात कर रहे हैं, वह रील लाइफ नहीं। बल्कि रीयल लाइफ हीरो है। बात जिस ऋतिक की हो रही है, उसने अपने गम को दबाकर केदारघाटी में आपदा में फंसे लोगों की मदद की।
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केदारनाथ जलप्रलय में पिता की कोई खबर नहीं मिलने पर, वह गुमसुम था। लेकिन उसने पिता की याद में सिसकते हुए डा. जैक्सवीन विद्यालय में लगाए गए राहत शिविर में यात्रियों की खूब सेवा करता रहा। इस सेवा का उसे मेवा भी मिला। उसके पिता आपदा के पांच दिन सकुशल गुप्तकाशी भी पहुंच गए।

ऊखीमठ तहसील के दूरस्थ गांव रांसी का ऋतिक नेगी डा. जैक्सवीन नेशनल विद्यालय गुप्तकाशी में कक्षा 10 में पढ़ता है। उसके पिता यात्राकाल में रामबाड़ा में चाय-पानी की दुकान चलाकर घर का खर्चा चलाते थे।
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बोर्ड परीक्षा को देखते हुए स्कूल में एक्सट्रा क्लासेज चलाई जा रही थी। 15 जून को एक्सट्रा क्लासेज खत्म होने पर सभी बच्चों को घर जाना था। लेकिन भारी बारिश से रास्ते टूट गए। जिससे ऋतिक को स्कूल में ही रुकना पड़ा। इसी बीच केदारनाथ हादसा हो गया। ऋतिक के पिता की कोई खबर नहीं थी कि वह किसी हालात में हैं और कहां हैं। इसी दौरान स्कूल में केदारघाटी में फंसे हुए लोग आने लगे और स्कूल राहत शिविर में बदल गया।

आंसू बहाने के बजाय लोगों की मदद की
स्कूल के चेयरमैन लखपत राणा बताते हैं कि ऋतिक ने कमरे में आंसू बहाने के बजाय आपदा में फंसे लोगों की मदद करना उचित समझा। स्कूल के स्टाफ और अन्य बच्चों के साथ वह दिन रात लोगों को खाना खिलाने और कमरों में उनको सुलाने की व्यवस्था में जुटा रहा। बाबा केदार ने उसको इस निस्वार्थ सेवा का फल भी दे दिया।
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22 जून को उसके पिता केदारनाथ से चॉपर के जरिए गुप्तकाशी पहुंच गए। आज सारा स्कूल ऋतिक को सैल्यूट कर रहा है।

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