चुनावी सीजन में दायित्व बांटने की में हड़बड़ी में कांग्रेस नेता रविंद्र जैन को उस उपक्रम हिलट्रान का चेयरमैन बना दिया गया, जिसे बंद करने का फैसला सरकार खुद ले चुकी है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार 31 मार्च 2016 को हिलट्रॉन की बंदी पर कैबिनेट में मुहर लगा चुकी है। हिलट्रॉन के कर्मचारी आईटीडीए में समायोजित किए जा चुके हैं।
वर्ष 1985 में तत्कालीन यूपी सरकार ने पर्वतीय क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स और एलाइड इंडस्ट्रीज को प्रमोट करने के लिए हिल इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (हिलट्रॉन) की स्थापना की थी।
मार्च 2016 में बंदी पर कैबिनेट ने लगाई बंदी पर मुहर
सीएम हरीश रावत
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इसकी स्थापना अपट्रॉन के पैटर्न पर की गई थी। उत्तराखंड बनने के बाद कई बड़े भ्रष्टाचार के आरोपों में हिलट्रॉन घिरा रहा। आखिरकार 31 मार्च 2016 को कैबिनेट ने हिलट्रॉन की बंदी पर मुहर लगा दी।
यहां के 86 कर्मचारी इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट अथॉरिटी (आईटीडीए) सहित विभिन्न विभागों में समायोजित किए जा चुके हैं।
प्रदेश में वाई-फाई जैसे तकनीक से जुड़े कार्यों के लिए शासन ने इससे पहले ही 15 जनवरी 2016 को एक शासनादेश जारी किया था, जिसमें साफ लिखा गया है कि हिलट्रॉन के समापन के चलते अब चार केंद्र में इंपैनल्ड संस्थाओं से वाई-फाई जैसे सभी काम कराए जाएंगे।
क्या कहते हैं आईटी सचिव
हरीश रावत
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इस संबंध में दीपक गैरोला, (आईटी सचिव) कहते हैं कि हिलट्रॉन को बंद करने पर प्रशासनिक सहमति बनने के बाद कैबिनेट ने भी इस पर मुहर लगा दी थी।
अभी इसे बंद करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें करीब पांच से छह माह का समय लगेगा। हो सकता है, तब तक के लिए चेयरमैन की जिम्मेदारी दी गई है।