कार्बेट नेशनल पार्क में पहली बार स्तनधारी वर्ग का लकड़बग्घा मिला है। यह कैमरे में ट्रैप हुआ है और इस वन्यजीव के पार्क में मिलने के बाद पार्क प्रशासन में खुशी की लहर है।
जंगल का सफाईकर्मी होता है लकड़बग्घा
पार्क निदेशक समीर सिन्हा ने बताया पार्क की दक्षिणी सीमा में लकड़बग्घा देखा गया है। यह प्राणी संरक्षित श्रेणी की प्रजातियों में रखे गए शेडयूल-3 का वन्यजीव है। लकड़बग्घे को आमतौर पर जंगल का सफाईकर्मी भी माना जाता है।
समीर सिन्हा ने बताया सीटीआर में इससे पूर्व स्तनधारियों की 55 प्रजातियां पाई जाती थीं। नए मेहमान की आमद के बाद इनकी संख्या 56 हो गई है। कार्बेट नेशनल पार्क में बनेगा इंटरनेशनल टाइगर सेंटर
कार्बेट पार्क को माना बाघों के लिए सबसे सुरक्षित वासस्थल
अगर सब ठीक रहा तो भविष्य में कार्बेट नेशनल पार्क में ‘इंटरनेशनल टाइगर सेंटर’ की स्थापना हो जाएगी। अमेरिका के ‘इंटरनेशनल वुल्फ सेंटर’ की संचालिका डा. नैंसी गिप्सन बीते तीन दिनों से कार्बेट नेशनल पार्क दौरे पर हैं।
इंटरनेशनल टाइगर सेंटर को लेकर उनकी भारत सरकार के कई अधिकारियों से बात हो चुकी है, जिसके बाद वह पूरे भारत के टाइगर रिजर्व के दौरे कर रही हैं।
कार्बेट नेशनल पार्क आने से पूर्व गिप्सन राजस्थान के रणथम्भौर और कान्हा टाइगर रिजर्व का दौरा कर वहां की जैव विविधता देख चुकी हैं। गिप्सन का मानना है कि जैव विविधता, संरक्षण, पर्यटक सुविधाओं और घनत्व के हिसाब से रामनगर का कार्बेट टाइगर रिजर्व बाघों के लिए सर्वाधिक सुरक्षित क्षेत्र है।
गिप्सन अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में इससे पहले वुल्फ सेंटर (भेड़िए के संरक्षण) में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। उन्होंने बताया कार्बेट टाइगर रिजर्व में एनटीसीए और भारत सरकार के सहयोग से इंटरनेशनल टाइगर सेंटर बनाया जाएगा। जिसके लिए वह यहां से जाने के बाद एनटीसीए और भारत सरकार के अधिकारियों से वार्ता करेंगी।